Parliament Attack: 13 दिसंबर 2001… ठीक 24 साल पहले संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था. महिला आरक्षण बिल पर हंगामे के बाद सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर सदन स्थगित कर दिया गया. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से निकल चुके थे, लेकिन उस समय 200 से ज्यादा सांसद और मंत्री भवन के भीतर मौजूद थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकी हमला होने वाला है.
संसद हमले की शुरुआत
करीब 11:30 बजे एक सफेद एंबेसडर कार गेट नंबर 12 से संसद में दाखिल हुई. उसमें पाकिस्तान समर्थित पांच आतंकी सवार थे. कार उपराष्ट्रपति की गाड़ी से टकराई और तुरंत गोलियों की बौछार शुरू हो गई. उस समय सुरक्षा गार्ड निहत्थे थे, जिससे शुरुआती पल बेहद खतरनाक साबित हुए.
AK-47 और ग्रेनेड से लैस आतंकी
आतंकियों के पास AK-47 और हैंड ग्रेनेड थे. उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. चार सुरक्षाकर्मी जो कार को रोकने की कोशिश कर रहे थे, सबसे पहले निशाना बने. संसद परिसर गोलियों की आवाज और धमाकों से गूंज उठा. तुरंत सभी दरवाजे बंद कर दिए गए और सांसदों को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया.
खूनी खेल और आतंकियों का अंत
एक आतंकी ने गेट नंबर एक से सदन में घुसने की कोशिश की लेकिन सुरक्षाबलों ने उसे वहीं मार गिराया. बाकी चार आतंकी गेट नंबर 4 और फिर गेट नंबर 9 की ओर बढ़े. वहां मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर हो गए. आखिरी आतंकी गेट नंबर 5 की ओर भागा, लेकिन वह भी सुरक्षाबलों की गोली से मारा गया. यह मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चली.
नौ लोगों ने गंवाई थी जान
इस हमले में संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हुए. उनकी बहादुरी ने देश को एक बड़े हादसे से बचा लिया.
जांच और सजा
दिल्ली पुलिस ने जांच में पाकिस्तान की भूमिका उजागर की. अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी और अफशान गुरु को बरी कर दिया, शौकत की सजा घटा दी गई, जबकि अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाई गई. 9 फरवरी 2013 को उसे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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