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शीतकालीन सत्र पहले रोज क्यों पेश हुआ स्थगन प्रस्ताव? जानें कांग्रेस सांसद के तर्क

Parliament Winter Session: लोकसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू है. ऐसे में पहले रोज ही पेश हुए एक स्थगन प्रस्ताव की चर्चा होने लगी है. इसे कांग्रेस सांसद कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दिया है. आइये जानें उनका तर्क क्या है?

Parliament Winter Session Why Congress MP Manickam Tagore Give Adjournment Motion In Lok Sabha On First Day

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर

Parliament Winter Session: कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोमवार को लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की गई है. टैगोर ने इसे ‘अभूतपूर्व संकट’ से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए. अपने नोटिस में टैगोर ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई यह प्रक्रिया एकतरफा, तानाशाही और बिना किसी तैयारी के शुरू कर दी गई है.

मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि आयोग ने न तो शिक्षकों से कोई चर्चा की, न राज्यों के साथ समन्वय किया और न ही जनता की परेशानियों का ध्यान रखा. अपने प्रस्ताव में कहा कि यह एसआईआर प्रक्रिया एक एकाधिकारवादी, अचानक लागू की गई और अत्यधिक दबाव वाली कवायद बन चुकी है.

मौत और आत्महत्या पर सवाल

सांसद ने कहा कि बीएलओ शिक्षक दिन-रात काम करने को मजबूर हैं. वे कक्षा और चुनावी कार्य के बीच फंसे हुए हैं. कई लोग थकावट के कारण गिर पड़े, कुछ की मौत हो गई और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने अब तक कोई जांच नहीं कराई है और न ही राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों के हिसाब से बीएलओ की मौतों के आंकड़े जारी किए हैं.

‘संस्थागत क्रूरता’ करार दिया

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इसे ‘संस्थागत क्रूरता’ करार दिया. उन्होंने कहा कि न तो आत्महत्याओं की निगरानी की कोई व्यवस्था है, न मानसिक स्वास्थ्य सहायता, न मुआवजा प्रावधान और न किसी प्रकार का आपातकालीन प्रोटोकॉल. आम जनता भी इस प्रक्रिया की वजह से भ्रम, घबराहट, बार-बार होने वाले सत्यापन और अविश्वास की स्थिति से गुजर रही है. उन्होंने कहा कि-

‘जब मतदाता सूची तैयार करने वाले कर्मचारी ही भारी दबाव में गिरने लगें, तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता भी गिर जाती है.’

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रखी गई 5 प्रमुख मांग (Winter Session Of Parliament)

लोकसभा के सामने उन्होंने पांच प्रमुख मांगें रखीं. 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत निलंबित किया जाए. हर एक बीएलओ की मौत और आत्महत्या की राष्ट्रीय स्तर पर पूरी जांच की जाए. प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए. चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार कर बीएलओ को सुरक्षित वातावरण मिले और चुनाव आयोग को तलब कर इस अव्यवस्थित लागू प्रक्रिया का स्पष्टीकरण मांगा जाए.

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