Patna High Court
Patna High Court: पटना हाई कोर्ट ने दारोगा बहाली मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 283 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया.
खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर याचिकाकर्ताओं को समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता. अदालत ने माना कि वर्ष 2004 की दारोगा बहाली प्रक्रिया (विज्ञापन संख्या 704/2004) से जुड़ा विवाद लंबे समय से विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन रहा है और यह चयन प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो चुकी है. ऐसे में अब दोबारा नियुक्ति का निर्देश देना कानूनन उचित नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 133 अभ्यर्थियों को दी गई नियुक्ति विशेष परिस्थितियों में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दी गई थी. शीर्ष अदालत ने स्वयं स्पष्ट किया था कि यह आदेश केवल उस विशेष परिस्थिति तक सीमित रहेगा और इसे नजीर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
वर्तमान याचिकाकर्ता मूल चयन प्रक्रिया में थे असफल
खंडपीठ ने यह भी कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता मूल चयन प्रक्रिया में असफल अभ्यर्थी थे और वे केवल इस आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे थे कि उनके अंक उन 133 नियुक्त अभ्यर्थियों से अधिक हैं. अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जहां नियुक्ति विशेष न्यायिक आदेश के तहत हुई हो, वहां समानता का अधिकार लागू नहीं होता.
इसी के साथ पटना हाई कोर्ट ने 20 अगस्त 2025 को पारित एकलपीठ के आदेश को रद्द कर सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और लंबे समय से चल रहे इस बहाली विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
