प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर सोशल मीडिया पर कई दिलचस्प और पुरानी यादें साझा की जा रही हैं. इसी कड़ी में ‘मोदी स्टोरी’ नाम के एक्स (X) हैंडल से एक बहुत ही खास पोस्ट शेयर किया गया है. इस पोस्ट में उस बड़े बदलाव का जिक्र किया गया है जिसने देश के अनगिनत गांवों और घरों में अंधेरा मिटाकर उजाला भर दिया.
आइए जानते हैं कि इस सफर की शुरुआत कैसे हुई और कैसे गुजरात से लेकर पूरे देश तक बिजली पहुंचाने का यह मिशन पूरा हुआ.
बात साल 2014 की है, जब नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला था. उस समय की हकीकत यह थी कि भारत के 18,452 ऐसे गांव थे जहां बिजली का नामोनिशान तक नहीं था. आजादी के इतने साल बाद भी लोग लालटेन और ढिबरी के सहारे जीने को मजबूर थे.
इस स्थिति को बदलने के लिए पीएम मोदी ने देश के बाकी बचे सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का एक बहुत बड़ा संकल्प लिया. ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ के जरिए इस काम को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया गया और आखिरकार देश के हर एक गांव तक बिजली पहुंच गई.
गांवों के बाद घर-घर तक पहुंची रोशनी
सिर्फ गांवों तक बिजली के खंभे पहुंचाना ही काफी नहीं था, बल्कि हर गरीब परिवार के घर को रोशन करना भी इस विजन का हिस्सा था. इसके बाद ‘सौभाग्य योजना’ की शुरुआत की गई. इस योजना ने गांवों की सीमाओं से आगे बढ़कर सीधे आम आदमी के घरों तक पहुंच बनाई. आंकड़े बताते हैं कि इस अभियान के तहत लगभग 2.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त या बेहद आसानी से बिजली के कनेक्शन दिए गए, जिससे उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई.
गुजरात से शुरू हुआ था इस बदलाव का सफर
इस पूरे विजन की नींव प्रधानमंत्री बनने से काफी पहले ही रख दी गई थी. साल 2006 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उन्होंने राज्य में ‘ज्योतिग्राम योजना’ की शुरुआत की थी. इस महत्वाकांक्षी योजना के दम पर गुजरात के 18,000 से ज्यादा गांवों तक निर्बाध बिजली पहुंचाई गई.
यह प्रोजेक्ट इतना सफल और असरदार था कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम खुद गुजरात पहुंचे थे. उन्होंने एक ‘ज्योतिग्राम’ गांव का दौरा किया और इस शानदार पहल को पूरे राष्ट्र के लिए एक प्रेरणा बताते हुए समर्पित किया.
गुजरात की ज्योतिग्राम योजना का पैमाना कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रोजेक्ट के शुरुआती 1,000 दिनों के भीतर ही जमीन पर रिकॉर्ड काम हुआ. इस दौरान करीब 20 लाख बिजली के खंभे लगाए गए, एक लाख किलोमीटर लंबी बिजली की लाइनें बिछाई गईं और 18 हजार से ज्यादा गांवों को रोशन कर दिया गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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