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चुनाव से पहले बिहार की बल्ले-बल्ले! पीएम मोदी ने दिया उपहार; कैबिनेट ने 2 बड़े प्रोजेक्ट्स पर लगाई मुहर

PM Modi Big Gift To Bihar: पीएम मोदी के नेतृत्व में 24 सितंबर को कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया. इसमें कई फैसले हुए. हालांकि, बिहार के लिए यहां से खास खबर निकल कर आई है. आइये जानें चुनाव से पहले राज्य को क्या मिला?

PM Modi Big Gift To Bihar

Bihar के लिए केंद्र सरकार के बड़े फैसले

PM Modi Big Gift To Bihar: बुधवार 24 सितंबर को पीएम मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट कैठक आयोजित हुई. इसमें सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और मेडिकल एजुकेशन में बड़ा बदलाव लाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में जहाजरानी, रेलवे, सड़क निर्माण और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश को हरी झंडी दी गई है. इन फैसलों का सीधा असर लाखों लोगों पर पड़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश के विकास को गति मिलेगी. खास तौर पर बिहार को एक बड़ा पैकेज मिला है, जिससे वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है.

बिहार को मिली बड़ी सौगात (PM Modi Cabinet Decision For Bihar)

  • बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलवे लाइन को डबल करने का फैसला
  • साहिबगंज-अरेराज-बेतिया के बीच NH-139W का 4-लेन निर्माण

रेलवे लाइन पर मुहर (PM Modi Give Railway Projects To Bihar)

104 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 2,192 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह लाइन बिहार के चार जिलों को जोड़ेगी और इससे यात्रियों को काफी सहूलियत होगी. यह परियोजना राजगीर (शांति स्तूप), नालंदा और पावापुरी जैसे तीर्थ और पर्यटन स्थलों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देगी, जिससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आसानी होगी. इससे लगभग 13.46 लाख लोगों को फायदा होगा और गया व नवादा जैसे आकांक्षी जिलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.

इस परियोजना से राजगीर (शांति स्तूप), नालंदा, पावापुरी आदि जैसे प्रमुख स्थलों को भी रेल संपर्क से जोड़ा जाएगा. इससे देश भर से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को यहां आने में आसानी होगी. मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 1,434 गांवों और लगभग 13.46 लाख आबादी और दो आकांक्षी जिलों (गया और नवादा) तक संपर्क बढ़ेगा. यह कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए एक आवश्यक मार्ग है.

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प्रोजेक्ट के क्या लाभ होगा?

  • 26 एमटीपीए का अतिरिक्त माल यातायात होगा
  • तेल आयात (5 करोड़ लीटर) को कम करने में मदद करेगा
  • CO2 उत्सर्जन (24 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा

पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

बढ़ी हुई लाइन क्षमता गतिशीलता में सुधार करेगी, भारतीय रेलवे के लिए बेहतर दक्षता प्रदान करेगी. मल्टी-ट्रैकिंग परिचालन भीड़भाड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों पर आवश्यक बुनियादी ढांचागत विकास होगा. इन परियोजनाओं की योजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुसार बनाई गई है, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

NH-139W का 4-लेन निर्माण (PM Modi Give Road Projects To Bihar)

साहिबगंज-अरेराज-बेतिया के बीच NH-139W का 4-लेन निर्माण है. 78.942 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 3,822.31 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह सड़क पटना को बेतिया से जोड़ेगी और उत्तर बिहार के वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ेगी. यह सड़क न सिर्फ परिवहन को सुगम बनाएगी, बल्कि पीएम गति शक्ति योजना के तहत 7 आर्थिक केंद्रों और 9 पर्यटन स्थलों को भी जोड़ेगी. इस प्रोजेक्ट से लगभग 14.22 लाख लोगों को सीधा और 17.69 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.

परियोजना क्यों है खास?

  • यह परियोजना सात पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्रों, छह सामाजिक केंद्रों, आठ लॉजिस्टिक केंद्रों, नौ प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों को जोड़ेगी
  • केसरिया बुद्ध स्तूप (साहेबगंज), सोमेश्वरनाथ मंदिर (अरेराज), जैन मंदिर और विश्व शांति स्तूप (वैशाली), और महावीर मंदिर (पटना) सहित प्रमुख विरासत और बौद्ध पर्यटन स्थलों तक पहुंच में सुधार होगा
  • यह राष्ट्रीय राजमार्ग-31, राष्ट्रीय राजमार्ग-722, राष्ट्रीय राजमार्ग-727, राष्ट्रीय राजमार्ग-27 और राष्ट्रीय राजमार्ग-227A के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क के रूप में काम करेगा
  • प्रस्तावित ग्रीनफील्ड मार्ग 100 किमी/घंटा की डिजाइन गति के मुकाबले 80 किमी/घंटा की औसत वाहन गति को सपोर्ट करेगा
  • इससे साहेबगंज और बेतिया के बीच कुल यात्रा समय मौजूदा विकल्पों की तुलना में 2.5 घंटे से घटकर 1 घंटा रह जाएगा

प्रस्तावित चार लेन वाली ग्रीनफील्ड परियोजना का उद्देश्य राज्य की राजधानी पटना और बेतिया के बीच संपर्क में सुधार लाना है. यह उत्तर बिहार के वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों को भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों तक जोड़ेगा. यह परियोजना लंबी दूरी के माल यातायात की आवाजाही में सहायता करेगी, प्रमुख बुनियादी ढांचे तक पहुंच में सुधार करेगी और कृषि क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और सीमा पार व्यापार मार्गों से संपर्क में सुधार करके क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुगम बनाएगी.

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चुनाव से पहले बिहार के लिए बड़े फैसले

बिहार में रेलवे और सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी इस बात का प्रमाण है कि सरकार क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दे रही है. इन योजनाओं से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे. सबसे खास बात की राज्य में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में इससे पहले प्रदेश के लिए हुए फैसले का महत्व और अधिक हो जाता है.



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