केंद्र सरकार द्वारा ‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना’ को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के लिए अहम कदम बताया है. उन्होंने कहा कि इस पहल से रणनीतिक खनिजों के मामले में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी और देश को नई तकनीकों के क्षेत्र में मजबूती मिलेगी.
लिथियम, निकेल और कोबाल्ट पर विशेष फोकस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री ने बताया कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे अहम खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत इन खनिजों से जुड़े रिफाइंड उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिसे बदलने के उद्देश्य से यह योजना लाई गई है.
योजना की प्रमुख खूबियां क्या हैं?
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई योजना के माध्यम से देश में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही निवेशकों को पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इससे घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ेगा और आवश्यक खनिजों से जुड़ी सप्लाई चेन भी अधिक मजबूत होगी.
भविष्य की तकनीकों पर भारत की नजर
अपने संदेश के अंत में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल आयात पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों को विकसित करने की क्षमता हासिल करना है. उन्होंने कहा कि देश को उभरती हुई तकनीकी जरूरतों के लिए खुद को तैयार करना होगा.
पांच साल तक लागू रहेगी योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को पांच वर्ष की अवधि के लिए मंजूरी दी है. इसके लिए कुल 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है. सरकार का उद्देश्य इस फंड के जरिए देश में आधुनिक खनिज प्रसंस्करण ढांचे को विकसित करना है.
घरेलू उद्योग और वैल्यू चेन को मिलेगा बल
सरकार के अनुसार, योजना के तहत नए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने और उन्हें परिचालन में लाने के लिए लक्षित वित्तीय सहायता दी जाएगी. इससे भारत की घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी, देश के भीतर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी.
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ईवी और रक्षा सेक्टर को होगा फायदा
इस योजना के अंतर्गत लिथियम और निकेल अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है. निकेल के प्रसंस्करण के दौरान कोबाल्ट भी उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होने की संभावना है. इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा क्षेत्र और विशेष इस्पात उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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