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सेशेल्स से लौटते ही पीएम मोदी एक्शन: शाम 4:30 बजे लगेगी टॉप सचिवों की क्लास, जानें क्या है खास?

पीएम मोदी मंगलवार शाम 4:30 बजे सभी केंद्रीय सचिवों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहे हैं. हर सचिव को रिपोर्ट कार्ड पेश करने के लिए सिर्फ 3 मिनट मिलेंगे. जानिए ‘विकसित भारत 2047’ और कैबिनेट फेरबदल से जुड़ी इस मीटिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी.

PM Modi

देश की राजधानी दिल्ली में इस वक्त सियासी और प्रशासनिक पारा सातवें आसमान पर है. मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चाओं के बीच, पीएम मोदी सेशेल्स का ऐतिहासिक दौरा खत्म कर सोमवार को दिल्ली लौट आए हैं. लेकिन पीएम के पास आराम का कोई वक्त नहीं है. मंगलवार शाम 4:30 बजे वे देश की टॉप ब्यूरोक्रेसी यानी सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक ‘हाई-वोल्टेज’ महामंथन करने जा रहे हैं. दो महीने से भी कम समय में शीर्ष नौकरशाही के साथ यह उनकी दूसरी सबसे बड़ी बैठक है.

‘सिर्फ 3 मिनट’ का अल्टीमेटम

इस मीटिंग का एजेंडा बिल्कुल साफ और कड़क है. सूत्रों के मुताबिक, हर एक सचिव को पीएम मोदी के सामने अपनी प्रेजेंटेशन देने के लिए महज 3 मिनट का समय दिया जाएगा. इन 3 मिनटों में उन्हें बताना होगा कि उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को आसान बनाने के लिए क्या किया है और आगे उनका रोडमैप क्या है. लंबे-चौड़े भाषणों की जगह सीधे नतीजों पर बात होगी.

‘विकसित भारत 2047’ और 7.8% की छलांग

इस महा-बैठक का मुख्य फोकस ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करना है. सरकार का उत्साह बढ़ा हुआ है क्योंकि हाल ही में आए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.8% की शानदार वृद्धि दर्ज की है. पीएम मोदी साफ कर चुके हैं कि उन्हें जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और पेंडिंग प्रोजेक्ट्स का समयबद्ध तरीके से निपटारा चाहिए.

‘रेड टेप’ खत्म करने के लिए दो खूंखार कमेटियां

नियमों के जंजाल को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने दो दिग्गजों को मैदान में उतारा है. राजीव गाबा समिति (HLC-NFRR): पूर्व कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली यह समिति 21वीं सदी के हिसाब से नया, लचीला और विश्वास-आधारित सिस्टम तैयार कर रही है. बिहार कैडर के तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी और कैबिनेट सचिवालय में विशेष सचिव केके पाठक के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स राज्यों के साथ मिलकर सुधारों को रॉकेट की स्पीड दे रही है.

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बड़े बदलाव की है आहट?

सियासी पंडितों का मानना है कि कैबिनेट फेरबदल से ठीक पहले सचिवों की यह ‘परफॉर्मेंस रिव्यू’ मीटिंग कोई सामान्य घटना नहीं है. प्रधानमंत्री यह देखना चाहते हैं कि कौन सा विभाग दौड़ रहा है और कौन सा घिसट रहा है. इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर सिर्फ प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि मंत्रालयों के बंटवारे में भी बड़े ‘खेल’ देखने को मिल सकते हैं.



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