भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और वैश्विक प्रभाव का एक और बड़ा अध्याय आज से यूरोप में लिखा जाने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 से 19 मई (2026) तक नॉर्वे की एक बेहद अहम और आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. कूटनीतिक नज़रों से देखें तो यह दौरा इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि पिछले 43 वर्षों में भारत के किसी भी प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है. खुद पीएम मोदी भी पहली बार नॉर्वे की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं, जिसे लेकर दोनों देशों में भारी उत्साह है.
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
इस दो दिवसीय यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (3rd India-Nordic Summit) है, जिसमें पीएम मोदी हिस्सा लेंगे. इस सम्मेलन के जरिए भारत नॉर्डिक देशों (नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड) के साथ नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), जलवायु परिवर्तन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने संबंधों को और मजबूत करेगा. तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस समिट पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं.
रॉयल मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता
अपने इस व्यस्त कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी का शानदार शाही स्वागत किया जाएगा. पीएम मोदी नॉर्वे के राजा (King) हेराल्ड V और क्वीन सोनजा से विशेष मुलाकात करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर (Jonas Gahr Støre) के बीच एक अहम द्विपक्षीय (Bilateral) बैठक होगी. इस बैठक में दोनों नेता रक्षा, व्यापार, ‘ब्लू इकोनॉमी’ और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
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बिजनेस और रिसर्च पर बड़ा फोकस
इन हाई-प्रोफाइल बैठकों के अलावा, पीएम मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर ‘इंडिया-नॉर्वे बिज़नेस और रिसर्च समिट’ को भी संबोधित करेंगे. इस समिट का उद्देश्य दोनों देशों की कंपनियों, निवेशकों और वैज्ञानिकों के बीच एक नया पुल बनाना है. 43 साल बाद हो रहे किसी भारतीय प्रधानमंत्री के इस दौरे से यह साफ हो गया है कि यूरोप और नॉर्डिक क्षेत्र अब भारत के ‘ग्लोबल विजन’ का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
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