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‘अधिकार छोड़ो, कर्तव्य चुनो’, कर्मयोगी साधना सप्ताह में पीएम मोदी ने बताई भविष्य की दिशा

PM Modi Sadhana Saptah: पीएम मोदी ने गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ का शुभारंभ किया. मिशन कर्मयोगी के 5 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय प्रशासनिक सेवा के इतिहास में क्षमता निर्माण का सबसे बड़ा साझा प्रयास माना जा रहा है.

PM Modi Sadhana Saptah

PM Modi Sadhana Saptah: पीएम मोदी ने ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ को संबोधित करते हुए देश की प्रशासनिक व्यवस्था को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढालने का आह्वान किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को ‘अधिकार’ के बजाय ‘कर्तव्य’ और ‘संवेदनशीलता’ पर ध्यान केंद्रित करना होगा.

तकनीकी क्रांति और AI पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भविष्य की प्रशासनिक दिशा को तकनीक से जोड़ते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का उपयोग अब सार्वजनिक सेवा का अनिवार्य हिस्सा बन गया है. पीएम ने कहा कि AI के आने के बाद शासन और वितरण प्रणाली में बदलाव और भी तेज होगा. तकनीक की मदद से हमें प्रगतिशील और पिछड़ी व्यवस्थाओं के बीच के अंतर को समाप्त करना होगा.

अधिकार नहीं, कर्तव्य सर्वोपरि

पीएम मोदी ने पुरानी व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले ‘अधिकारी’ बनने पर केवल ‘अधिकार’ जताने पर जोर दिया जाता था. लेकिन आज की सरकार का मूलमंत्र ‘नागरिक देवो भवः’ है. उन्होंने कहा कि-

“सफलता का सिद्धांत दूसरों की लकीर छोटी करना नहीं, बल्कि अपनी लकीर बड़ी करना है. हमें सक्षम कर्मयोगियों की एक ऐसी टीम बनानी है जो नागरिकों के प्रति उत्तरदायी और संवेदनशील हो.”

क्या है ‘साधना सप्ताह 2026’?

क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा 2 से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित यह विशेष सप्ताह कई मायनों में ऐतिहासिक है. यह पहल 250 से अधिक प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों को एक मंच पर लाती है. यह आयोजन मिशन कर्मयोगी के 5 वर्ष पूरे होने और क्षमता निर्माण आयोग के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है. इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों में उन दक्षताओं को विकसित करना है जो ‘विकसित भारत 2047’ के आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों के लिए आवश्यक हैं.

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‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ भारतीय नौकरशाही को ‘रूल-बेस्ड’ (नियम आधारित) से ‘रोल-बेस्ड’ (भूमिका आधारित) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार, जब देश का हर कर्मयोगी तकनीक से लैस और कर्तव्य के प्रति जागरूक होगा, तभी 2047 के भारत का कैनवास पूरी तरह से जीवंत हो सकेगा.



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