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भारत-जापान संयुक्त बयान में चीन को सख्त संदेश, पीएम मोदी और साने ताकाइची ने UNSC नियमों की याद दिलाई

पीएम मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची ने दिल्ली में वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त बयान जारी कर पूर्वी व दक्षिण चीन सागर में बढ़ते सैन्यीकरण और एकतरफा कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई. नेताओं ने उत्तर कोरिया, म्यांमार, होर्मुज स्ट्रेट और गाजा संकट पर भी साझा रुख अपनाया.

PM Modi Sanae Takaichi

पीएम मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने गुरुवार को पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की संवेदनशील स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई. नई दिल्ली में आयोजित 16वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी एक व्यापक संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने दोटूक कहा कि वे ऐसे किसी भी एकतरफा कदम का कड़ा विरोध करते हैं, जो समुद्री और हवाई आवाजाही की सुरक्षा और आजादी को खतरे में डालता हो या फिर ताकत या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति (यथास्थिति) को बदलने की कोशिश करता हो.

UNCLOS के पालन पर जोर

संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने विवादित इलाकों में बढ़ते सैन्यीकरण पर भी गंभीर चिंता जताई. समुद्री विवादों का समाधान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार होना चाहिए, जैसा कि यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) में स्पष्ट रूप से तय किया गया है.

म्यांमार हिंसा पर कड़ा संदेश

दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक उत्तर कोरिया को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तर कोरिया से और उत्तर कोरिया तक परमाणु व मिसाइल तकनीक के अवैध फैलाव को लेकर लगातार बनी हुई चिंताओं का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए. उन्होंने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की कि वे सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करें, जिसमें उत्तर कोरिया को हथियार भेजने या वहां से खरीदने पर लगी रोक शामिल है. दोनों नेताओं ने अपहरण से जुड़े मामलों के जल्द समाधान की बात भी कही.

इसके अतिरिक्त, दोनों प्रधानमंत्रियों ने म्यांमार की स्थिति और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चिंता जताई. उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिससे सभी हितधारकों के बीच सार्थक बातचीत हो सके और म्यांमार के नेतृत्व व भागीदारी से एक शांतिपूर्ण समाधान निकले.

टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन

दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. ईरान से जुड़े हालात पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करना, ऊर्जा और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) का पालन करना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही दोनों नेताओं ने गाजा के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना को आगे बढ़ाने और दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के वादे को पूरा करने की जरूरत पर भी बल दिया.

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यूक्रेन में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की वकालत

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने यूक्रेन में भी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के अनुसार न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने इस दिशा में अलग-अलग देशों द्वारा किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में जल्द ही स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.



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