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‘विदेशी ताकतों के आगे कभी नहीं झुका वो सिर’- महाराणा प्रताप की वीरता पर पीएम मोदी ने दी प्रतिक्रिया

महाराणा प्रताप की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘स्वाभिमान का अमर प्रतीक’ बताया. पीएम ने उनके अदम्य साहस और मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया.

PM Modi Pays Tribute to Maharana Pratap on Birth Anniversary Symbol of Valor

आज का दिन हर उस भारतीय के लिए गर्व और जोश से भरा है, जो इतिहास की वीर गाथाओं में यकीन रखता है. अवसर है अदम्य साहस और राजपूती आन-बान-शान के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती का. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेवाड़ के इस महान योद्धा को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.

मातृभूमि की गरिमा को नहीं आने दी आंच

प्रधानमंत्री ने महाराणा प्रताप को शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान का एक ऐसा ‘अमर प्रतीक’ बताया, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में शायद ही कहीं मिले. पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में कहा कि महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि की गरिमा को कभी आंच नहीं आने दी और इसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया.

स्वाभिमान के आगे झुकी विशाल सेना

पीएम मोदी ने विशेष रूप से महाराणा प्रताप के उस अडिग संकल्प को याद किया, जिसके आगे मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना को भी संघर्ष करना पड़ा था. पीएम ने कहा कि महाराणा प्रताप ने कभी हार नहीं मानी और मेवाड़ की आजादी के लिए जंगलों में भटकना तो स्वीकार किया, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया.

हल्दीघाटी का युद्ध, जो आज भी हमारी रगों में देशभक्ति का संचार करता है, उसे प्रधानमंत्री ने वीरता का ‘अमिट प्रतीक’ बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन सिर्फ एक राजा की कहानी नहीं है, बल्कि यह हम सभी के लिए देशभक्ति और आत्मसम्मान का एक जीता-जागता संदेश है.

इतिहास के पन्नों से

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था. वे इतिहास के उन गिने-चुने योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने महलों के सुख-सुविधाओं की जगह मातृभूमि की आजादी को चुना. उनकी वीरता की कहानियां आज भी राजस्थान की मिट्टी से लेकर दिल्ली के गलियारों तक बड़े ही सम्मान के साथ सुनाई जाती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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