आज बंगाल की हवाओं में एक अलग ही सुंगध है. मौका है ‘पच्चीस बैसाख’ का, जिसे हर बंगाली और साहित्य प्रेमी त्योहार की तरह मनाता है. इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए उन्हें बेहद भावुक श्रद्धांजलि दी है. प्रधानमंत्री ने इस बार न सिर्फ हिंदी, बल्कि बांग्ला भाषा में अपना संदेश साझा कर सीधे लोगों के दिलों पर दस्तक दी.
समाज को दी नई सोच: PM Modi
पीएम मोदी ने गुरुदेव को एक ऐसी शख्सियत बताया जो सिर्फ कवि नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की वह आवाज थे जो कभी पुरानी नहीं पड़ती. उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर साहित्य, दर्शन और शिक्षा के उन प्रणेताओं में से हैं, जिन्होंने समाज को नई सोच और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की ताकत दी.
আজ, পঁচিশে বৈশাখের এই বিশেষ দিনে, আমরা গুরুদেব ঠাকুরের প্রতি আমাদের অন্তরের শ্রদ্ধা নিবেদন করছি।
গুরুদেব ঠাকুর ছিলেন এক অসাধারণ প্রতিভার অধিকারী সাহিত্যিক, চিন্তক ও কবি। তিনি একজন অনন্য দার্শনিক, শিক্ষাবিদ, শিল্পী এবং ভারতীয় সভ্যতার চিরন্তন কণ্ঠস্বর হিসেবে নিজেকে প্রতিষ্ঠিত…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 9, 2026
वहीं, इस बार की रवींद्र जयंती और भी खास हो गई है क्योंकि पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह भी आज यानी गुरुदेव की जयंती के दिन ही रखा गया है. राजनीति के जानकारों के अनुसार ये बंगाल की महान सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान दिखाने का एक बड़ा जरिया है.
विश्वकवि: आज भी सिखाते हैं जीना
रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) सिर्फ नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई नहीं थे, बल्कि वह एक ऐसे विजनरी थे जिन्होंने शांतिनिकेतन (विश्वभारती) के जरिए दुनिया को शिक्षा का नया दर्शन दिया. पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे टैगोर की रचनाएं आज भी भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करती हैं. भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का ‘अमर सोनार बांग्ला’ उनके कालजयी लेखन का ही प्रमाण है.
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-भारत एक्सप्रेस
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