पावन पर्व महर्षि वाल्मीकि जयंती के पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए रामायण के अमर संदेश और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी के महान विचारों को याद किया है. पीएम मोदी ने कहा कि रामायण के जरिए महर्षि वाल्मीकि ने हम सभी को जीवन के बेहद गहरे और अनमोल सबक सिखाए हैं. उन्होंने न केवल निरंतर प्रयास और मेहनत का महत्व समझाया, बल्कि सेवा, करुणा, सद्भाव और सामाजिक समरसता की ऐसी भावना जगाई, जो युगों-युगों तक मानव सभ्यता का मार्गदर्शन करती रहेगी.
समरसता और समावेशिता का अनूठा उदाहरण
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में प्रभु श्रीराम का चरित्र इन सभी मानवीय मूल्यों का सबसे सुंदर और सजीव उदाहरण है. श्रीराम ने अपने जीवन में कभी भेद-भाव नहीं किया. उन्होंने माता शबरी के अगाध प्रेम और भक्ति को सहर्ष स्वीकार किया और निषादराज के साथ अपनी गहरी मित्रता का मान रखा.
पीएम मोदी के अनुसार, समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की यही समावेशी सोच आज के समय में भी हमारे देश और समाज के लिए एक मजबूत मार्गदर्शक रोशनी की तरह काम कर रही है.
अयोध्या राम मंदिर में भी दिखती है यही पावन भावना
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महर्षि वाल्मीकि जी का यह समरसता का संदेश आज अयोध्या के भव्य राम मंदिर परिसर में भी स्पष्ट रूप से झलकता है. राम मंदिर के साथ-साथ परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को समर्पित दिव्य मंदिरों की स्थापना की गई है, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समरसता का प्रतीक हैं.
इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण महर्षि वाल्मीकि जी के नाम पर किया गया है, जो इस महान संत के प्रति पूरे देश का एक सच्चा और नमन योग्य सम्मान है.
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-भारत एक्सप्रेस
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