PM Modi 2001 New Zealand Visit story: 40 साल बाद न्यूजीलैंड में मजे ले रहे लोग, लेकिन क्या आप जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरे (PM Modi New Zealand Visit) को लेकर जहां पूरे देश और दुनिया में कूटनीतिक चर्चाएं गर्म हैं, वहीं ऑकलैंड में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच उनकी 25 साल पुरानी एक बेहद दिलचस्प और भावुक याद फिर से ताजा हो गई है.
पूरे 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस पहली न्यूजीलैंड आधिकारिक यात्रा के बीच, वहां के भारतीय मूल के लोगों ने वर्ष 2001 में हुई नरेंद्र मोदी की उस यात्रा को याद किया है, जब उन्होंने पहली बार विदेशी धरती पर प्रवासी भारतीय बच्चों को अपनी संस्कृति और सनातनी मूल्यों से जोड़ने की एक बड़ी मुहिम की नींव रखी थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संचालित लोकप्रिय हैंडल ‘मोदी स्टोरी’ पर साझा की गई यह कहानी इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है.
Dinesh Pahuja recalls Narendra Modi’s deep focus on cultural preservation during his 2001 visit to New Zealand.
While visiting a ‘Gujarati School’ run by the Manukau Indian Association, Modi ji suggested embedding cultural values and heritage into the curriculum.
His goal? To… pic.twitter.com/ygND9YgW07
— Modi Story (@themodistory) July 10, 2026
मुख्यमंत्री बनने से ठीक पहले ऑकलैंड पहुंचे थे मोदी(PM Modi 2001 New Zealand Visit story)
भारतीय मूल के दिनेश पाहूजा ने ‘मोदी स्टोरी’ से एक विशेष बातचीत में वर्ष 2001 की उस ऐतिहासिक यात्रा की कड़क यादें साझा की हैं. उन्होंने बताया कि यह उस समय की बात है जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे और भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ संगठनकर्ता के रूप में न्यूजीलैंड के दौरे पर आए थे.
पाहूजा ने बताया कि अपने उस दौरे के दौरान मोदी जी ने मैनुकाउ इंडियन एसोसिएशन द्वारा संचालित एक स्थानीय गुजराती स्कूल का दौरा किया था.वहां पहुंचते ही उन्होंने सीधे स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों से संवाद स्थापित किया और स्कूल के पाठ्यक्रम को लेकर एक ऐसा बुनियादी सवाल पूछा, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया.
गुजराती स्कूल के प्रबंधन से पूछा तीखा सवाल
दिनेश पाहूजा के मुताबिक, स्कूल के निरीक्षण के दौरान नरेंद्र मोदी ने प्रबंधन से बेहद शालीनता से पूछा कि क्या यहां बच्चों को केवल गुजराती भाषा लिखना और बोलना सिखाया जाता है, या उन्हें भारतीय संस्कृति, सनातनी परंपराओं और जीवन मूल्यों की भी कोई जानकारी दी जाती है. जब स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बताया कि उनका मुख्य ध्यान केवल भाषा शिक्षा पर ही केंद्रित रहता है, तो मोदी जी ने उन्हें एक बड़ा और कड़क सुझाव दिया.
उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ किताबी भाषा सिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पाठ्यक्रम में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, महान परंपराओं और नैतिक मूल्यों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि विदेशी चकाचौंध के बीच भी बच्चों के संस्कार सुरक्षित रहें.
सात समंदर पार मजबूत हुई भारत की जड़ें
‘मोदी स्टोरी’ ने भी सोशल मीडिया पर इस याद (PM Modi 2001 New Zealand Visit story) को साझा करते हुए लिखा कि मैनुकाउ इंडियन एसोसिएशन के उस दौरे पर नरेंद्र मोदी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विदेश में पल-बढ़ रहे बच्चे केवल एक भाषा के जानकार बनकर न रह जाएं बल्कि वे अपनी भारतीय जड़ों, संस्कृति और महान इतिहास पर गर्व करना सीखें.
दरअसल उनका मानना था कि जब तक प्रवासी बच्चे अपनी मातृभूमि की संस्कृति और वहां हो रहे आधुनिक विकास को बेहतर ढंग से नहीं समझेंगे, तब तक उनका भारत से स्थायी जुड़ाव नहीं हो पाएगा. आज जब 25 साल बाद वही नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनकर दोबारा ऑकलैंड पहुंचे हैं, तो भारतीय समुदाय उनकी दूरदर्शी सोच का लोहा मान रहा है, जिसने सात समंदर पार भी ‘मिनी भारत’ को जीवंत रखा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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