PM Modi on Pandit Deendayal Upadhyaya Punyatithi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘मातृभूमि के अनन्य उपासक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन. मूल्यों पर आधारित उनके सिद्धांत और विचार देश की हर पीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे.’
‘अंत्योदय की भावना से समर्पित जीवन’
एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि “सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है. अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. ” इसको लेकर उन्होंने संस्कृत सुभाषित भी शेयर किया, “यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः. यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥” इसका अर्थ है, “जिस राष्ट्र की महिमा का गान हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करें. ”
अन्य नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा कि ‘अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का परिचायक है. ऐसा विचार देने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय असंख्य पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा बने रहेंगे.’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि ‘डबल इंजन सरकार में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना उनके चिंतन की ही जीवंत अभिव्यक्ति है. पंडित जी के आदर्शों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान, नारी और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है.’
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक समर्पित राष्ट्रसेवक
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा के नगला चंद्रभान में हुआ था. बचपन में ही माता-पिता व भाई को खोने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. कानपुर से बीए प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा भी उत्तीर्ण की लेकिन देशसेवा को प्राथमिकता दी. 1937 में RSS से जुड़े और प्रचारक बने. बताते चलें कि 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ भारतीय जनसंघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1952 से 1967 तक महासचिव रहे. 1967 में जनसंघ के अध्यक्ष बने. ‘एकात्म मानववाद’ उनका मौलिक दर्शन था जो साम्यवाद व पूंजीवाद दोनों का विकल्प था. गरीबों, अंत्योदय के उत्थान पर उनका विशेष बल था.
वहीं 11 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय रेलवे स्टेशन (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) के पास रेलवे ट्रैक पर उनकी रहस्यमय मृत्यु हो गई. आज BJP उनकी विचारधारा से प्रेरित है. उनकी पुण्यतिथि को सर्वोदय दिवस के रूप में मनाया जाता है. दीनदयाल जी सादगी, त्याग और देशभक्ति के प्रतीक हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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