Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

पीएम मोदी ने साझा किया महाभारत का खास श्लोक, बताया जीवन में सफलता पाने का मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया गया है. उन्होंने मन और वाणी को संयमित कर सभी श्रेष्ठ उपलब्धियां प्राप्त करने का संदेश दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर महाभारत का एक प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए मन और वाणी पर नियंत्रण रखने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री की इस पोस्ट में जीवन को बेहतर बनाने के साथ-साथ व्यक्ति के व्यवहार, सोच और उसके कर्मों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सीख भी छिपी है.

पीएम मोदी ने जो श्लोक साझा किया, वह महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि जिस व्यक्ति का मन और वाणी हमेशा संयमित रहते हैं और जो अपने जीवन में तप, त्याग तथा सत्य को महत्व देता है, वह जीवन में बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है.

क्या है प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए श्लोक का अर्थ?

प्रधानमंत्री ने एक्स पर यह संस्कृत श्लोक साझा किया है:

“यस्य वाङ्मनसी स्यातां सम्यक् प्रणिहिते सदा.तपस्त्यागश्च सत्यं च स वै सर्वमवाप्नुयात्॥”

इसका सरल हिंदी अर्थ है कि जिस इंसान का मन और वाणी हमेशा सही दिशा में रहते हैं, जो अपनी बात सोच-समझकर कहता है और अपने विचारों पर नियंत्रण रखता है, वह जीवन में सफलता जरूर प्राप्त करता है। इसके साथ ही उसके जीवन में तपस्या, त्याग और सच्चाई जैसे गुण भी होने चाहिए.

सिर्फ बड़े सपने देखना ही काफी नहीं है. उन्हें पूरा करने के लिए अपने विचारों को सही रखना, व्यवहार में ईमानदारी लाना और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर टिके रहना जरूरी है.

मन और वाणी पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?

इस श्लोक की सबसे बड़ी सीख यह है कि इंसान को अपनी जुबान और सोच दोनों पर काबू रखना चाहिए। कई बार हम बिना सोचे-समझे ऐसी बातें कह देते हैं, जिससे सामने वाले को दुख पहुंचता है या रिश्तों में दूरी आ जाती है। इसलिए बोलने से पहले अपने शब्दों पर विचार करना जरूरी है.

वाणी का संयम रखने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अपनी बात कहना छोड़ दे। इसका असली अर्थ है कि वह अपनी बात इस तरह रखे, जिससे किसी को बेवजह ठेस न पहुंचे। जहां जरूरी हो, वहां सच बोलने का साहस भी रखे और अपनी भाषा में सम्मान बनाए रखे.

इसी तरह मन को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी है। इंसान का मन अक्सर इधर-उधर भटकता रहता है. कभी बीती बातों की चिंता होती है तो कभी भविष्य को लेकर डर सताता है। ऐसे में जरूरी है कि व्यक्ति अपनी ऊर्जा को नकारात्मक सोच में लगाने के बजाय अपने लक्ष्य और अच्छे कामों पर ध्यान दे.

तप, त्याग और सत्य से मिलती है सफलता की राह

इस श्लोक में तीन महत्वपूर्ण गुणों का भी जिक्र किया गया है- तप, त्याग और सत्य। ये तीनों किसी भी व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

  • तप का अर्थ: अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करना, कठिनाइयों का सामना करना और अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहना.
  • त्याग का अर्थ: अपने स्वार्थ, अहंकार और गलत आदतों को छोड़ना। जरूरत पड़ने पर दूसरों की भलाई के लिए अपनी सुख-सुविधाओं से समझौता करना.
  • सत्य का अर्थ: अपने विचारों, बातों और कामों में ईमानदारी रखना। किसी भी परिस्थिति में झूठ और छल का सहारा न लेना.

इन गुणों को अपनाना आसान नहीं होता, लेकिन यही बातें इंसान के व्यक्तित्व को मजबूत बनाती हैं। जब व्यक्ति अपने व्यवहार में इन्हें जगह देता है, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और लोग उस पर भरोसा करने लगते हैं.

महाभारत के शांतिपर्व से जुड़ी है यह सीख

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया यह श्लोक महाभारत के शांतिपर्व का हिस्सा है। गीता प्रेस की ओर से प्रकाशित ‘गीतार्थ संग्रह’ जैसे धार्मिक और साहित्यिक संकलनों में भी इसका उल्लेख मिलता है। इस श्लोक का संदेश आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले हुआ करता था.

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई सफलता, पैसा और पहचान हासिल करना चाहता है. लेकिन कई बार इस दौड़ में लोग अपने व्यवहार, रिश्तों और नैतिक मूल्यों को पीछे छोड़ देते हैं। ऐसे समय में यह श्लोक याद दिलाता है कि असली सफलता सिर्फ बाहरी उपलब्धियों से नहीं मापी जाती.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital