प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर महाभारत से जुड़ा एक संस्कृत श्लोक साझा किया. इस श्लोक के जरिए उन्होंने लोगों को जीवन में सही फैसले लेने, समझदारी से काम करने और अपने कर्मों के दम पर लंबे समय तक सम्मान हासिल करने का संदेश दिया. इसमें खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि इंसान को सिर्फ अच्छी बातें सुनकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए, बल्कि उन्हें समझकर अपने जीवन और काम में भी उतारना चाहिए.
पीएम मोदी ने जो सुभाषित साझा किया है, वह संस्कृत में है. इसके बोल हैं—
“सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः. अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥”
इसका आसान हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति बुद्धिमान और अनुभवी लोगों की बातों को ध्यान से सुनता है, उनके परिणामों पर विचार करता है और फिर पूरी लगन व दृढ़ निश्चय के साथ अपने काम में जुट जाता है, उसे लंबे समय तक यश और सम्मान मिलता है. ऐसा व्यक्ति न सिर्फ अपनी तरक्की करता है, बल्कि राष्ट्र की उन्नति में भी अहम योगदान देता है.
महाभारत की विदुर नीति से लिया गया है श्लोक
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व में शामिल विदुर नीति से लिया गया है. यह विदुर नीति के 39वें अध्याय का 31वां श्लोक है. महाभारत की कथा के मुताबिक, कुरुक्षेत्र में युद्ध शुरू होने से पहले हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र पांडवों के अधिकारों और आगे पैदा होने वाली परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे. इसी दौरान महात्मा विदुर ने उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं. यह श्लोक भी उन्हीं की सीख का हिस्सा है.
विदुर ने इस संदेश के जरिए धृतराष्ट्र को बताया था कि किसी भी व्यक्ति, खासकर शासन की जिम्मेदारी संभालने वाले राजा को अपने फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए. केवल दूसरों की सलाह सुन लेना ही काफी नहीं होता. जरूरी यह है कि उस सलाह के पीछे छिपे अर्थ को समझा जाए और यह भी देखा जाए कि भविष्य में उसके क्या नतीजे निकल सकते हैं.
सिर्फ सलाह सुनना नहीं, उस पर अमल करना भी जरूरी
इस श्लोक की सीख आज के समय में भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. अक्सर लोग किसी बड़े काम की शुरुआत जोश में कर देते हैं, लेकिन उसके दूरगामी परिणामों के बारे में ठीक से नहीं सोचते. बाद में जल्दबाजी में लिया गया यही फैसला परेशानी की वजह बन सकता है.
विदुर नीति का संदेश है कि कोई भी महत्वपूर्ण कदम उठाने से पहले अनुभवी और समझदार लोगों की राय जरूर लेनी चाहिए. उनकी बातों पर विचार करना चाहिए और फिर हालात को समझते हुए फैसला लेना चाहिए. इसके बाद अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी मेहनत और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
दरअसल, सफलता केवल जल्दी कुछ हासिल कर लेने का नाम नहीं है. असली कामयाबी वह है, जो सही फैसलों, मेहनत और अच्छे आचरण के आधार पर मिले. जल्दबाजी से मिली उपलब्धि कुछ समय के लिए खुशी दे सकती है, लेकिन सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ किए गए काम की पहचान लंबे समय तक बनी रहती है.
-भारत एक्सप्रेस
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