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बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पीएम मोदी ने किया नमन, बोले- उनका योगदान देश को हमेशा प्रेरित करता रहेगा

पीएम नरेंद्र मोदी ने बलिदान दिवस के अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन किया और उन्हें एक महान देशभक्त व विद्वान बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा.

PM Modi, Syama Prasad Mookerjee, Balidan Diwas

Balidan Diwas: PM Modi ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. बलिदान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें एक महान राष्ट्रभक्त, विद्वान और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत की प्रगति, एकता और राष्ट्रीय हितों के लिए समर्पित कर दिया था.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा- “बलिदान दिवस पर मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. वे एक महान देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया. सार्वजनिक जीवन में उनका दृढ़ विश्वास, साहस और राष्ट्रहित के प्रति उनकी निष्ठा आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती है.”

पीएम मोदी ने आगे लिखा- “डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारे सामूहिक स्मरण में हमेशा याद रखा जाएगा. हम एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के अपने संकल्प को दोहराते हैं, जो उन मूल्यों से प्रेरित है जिनके लिए उन्होंने अपने अंतिम समय तक काम किया और उन्हें जिया.”

शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में छोड़ी गहरी छाप

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम उन चुनिंदा नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अहम योगदान दिया. उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. उनके परिवार का शिक्षा और कानून के क्षेत्र में विशेष योगदान रहा था, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व में भी साफ दिखाई देता था.

कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और 1934 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने. उस समय वह विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति थे. 1934 से 1938 तक अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा के विस्तार और शैक्षणिक सुधारों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए.

भारत की पहली सरकार में निभाई अहम जिम्मेदारी

राजनीति में उनका सफर 1929 में शुरू हुआ, जब वे एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बंगाल विधान परिषद के लिए चुने गए. शुरुआती दौर में उनका जुड़ाव कांग्रेस से भी रहा लेकिन बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने अलग राह चुनी और हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए.

देश की आजादी के बाद डॉ. मुखर्जी को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट में उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया गया. 1947 से 1950 तक उन्होंने इस पद पर रहते हुए औद्योगीकरण को बढ़ावा देने, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भरता की सोच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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मतभेदों के बाद बनाई भारतीय जनसंघ

समय के साथ कश्मीर, पाकिस्तान और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर उनके और नेहरू सरकार के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ने लगे. आखिरकार उन्होंने 1950 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों पर आधारित यह पार्टी आगे चलकर देश की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी. बाद में भारतीय जनसंघ की विचारधारा और संगठनात्मक आधार ने भारतीय जनता पार्टी के गठन की नींव रखी.

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-भारत एक्सप्रेस



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