Bihar Election 2025: चुनावों के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में अपनी सोच और विजन को साफ किया है. उन्होंने कहा कि वह पूंजीवाद के समर्थक हैं और मानते हैं कि पूंजी सिर्फ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि आम लोगों के हाथों में भी आनी चाहिए. उनका कहना है कि समाज के नाम पर गरीबी बांटने से बिहार आगे नहीं बढ़ेगा बल्कि पूंजी का निर्माण और उसका सही इस्तेमाल ही राज्य को तरक्की दिला सकता है.
यूरोपियन मॉडल का सपना
प्रशांत किशोर ने यह भी साफ किया कि वह अमेरिका वाला कैपिटलिज्म नहीं बल्कि यूरोपियन मॉडल को बिहार में लागू करना चाहते हैं. यूरोपियन मॉडल में संसाधनों और पूंजी का बंटवारा ज्यादा संतुलित होता है और इसमें जनता की भागीदारी भी अधिक रहती है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में पूंजी कुछ बड़े परिवारों और उद्योगपतियों के हाथों में केंद्रित है जबकि यूरोप में यह कई हिस्सों में बंटी होती है. यही वजह है कि वह बिहार में ऐसा मॉडल देखना चाहते हैं, जिसमें आर्थिक ताकत कुछ हाथों में न होकर व्यापक रूप से फैली हो.
#WATCH | Jan Suraaj founder Prashant Kishor says, "I am pro-capital, and I welcome capital. Our fundamental belief is that capital doesn't come only from a few industrialists. Capital should be created in the hands of people, and consumption should increase. I don't want to… pic.twitter.com/KI8JiFKAtS
— ANI (@ANI) November 9, 2025
प्रशांत किशोर का बिहार के लिए विजन
उन्होंने दो टूक कहा कि वह समाज के नाम पर गरीबी बांटने के खिलाफ हैं. उनका मानना है कि बिहार को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी का निर्माण जरूरी है. रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों पर केंद्रित उनके चुनाव प्रचार में भी यही संदेश बार-बार सामने आता है कि बिहार को अवसरों की जरूरत है, न कि गरीबी को बांटने की.
बिहार के लिए नया विकल्प
प्रशांत किशोर इस बार अपनी जन सुराज पार्टी के साथ चुनावी मैदान में हैं और जनता को एक नया विकल्प देने का दावा कर रहे हैं. उनका विजन साफ है, बिहार को एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाना, जहां पूंजी का सही बंटवारा हो, रोजगार बढ़े और लोग अपने राज्य में रहकर तरक्की कर सकें. उनके मुताबिक यही रास्ता बिहार को गरीबी से निकालकर विकास की ओर ले जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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