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प्रयागराज महाकुंभ 2025 में गंगा यमुना के पानी की गुणवत्ता पर एनजीटी की सुनवाई

प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान गंगा और यमुना के पानी की गुणवत्ता पर एनजीटी 28 फरवरी को सुनवाई करेगा. सीपीसीबी की रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता नहाने के लिए उपयुक्त नहीं बताई गई है.

Mahakumbh Water Pollution
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान गंगा और यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर दायर याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) 28 फरवरी को सुनवाई करेगा. इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के लिए एनजीटी से समय मांगा है. यूपीपीसीबी ने कोर्ट को बताया कि वे सीपीसीबी की रिपोर्ट की जांच करेंगे और गंगा व यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर उचित कदम उठाएंगे.

संगम का पानी नहाने के लिए उपयुक्त बताया

यूपीपीसीबी की ओर से पेश वकील ने सुनवाई में कहा कि संगम का पानी नहाने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है. उन्होंने यह भी कहा कि नालों के माध्यम से कोई भी प्रदूषित सीवेज गंगा या यमुना नदी में नहीं छोड़ा जा रहा है. यूपी सरकार ने एनजीटी को सूचित किया कि प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी के 6 पॉइंट्स पर पानी नहाने के लिए उपयुक्त है. हालांकि, शास्त्री ब्रिज के पास बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड और फीकल कोलीफॉर्म के आंकड़ों में मामूली वृद्धि देखी गई है.

सीपीसीबी की रिपोर्ट और एनजीटी की चिंता

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि प्रयागराज महाकुंभ मेला 2025 के दौरान विभिन्न स्थानों पर अपशिष्ट जल का स्तर स्नान के लिए उपयुक्त नहीं था. सीपीसीबी के अनुसार, अपशिष्ट जल प्रदूषण के सूचक फीकल कोलीफॉर्म की स्वीकार्य सीमा 2500 यूनिट प्रति 100 एमएल है, लेकिन रिपोर्ट में यह सीमा पार कर गई. इससे यह संकेत मिलता है कि गंगा और यमुना के पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त नहीं थी.

एनजीटी की फटकार और पिछले मामलों का उल्लेख

16 फरवरी 2025 को एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपने 50 करोड़ लोगों को सीवेज के दूषित पानी से नहला दिया, जो नहाने के लिए भी उपयुक्त नहीं था. एनजीटी के वकील गौरव बंसल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारें गंगा जैसी पवित्र नदियों का पानी साफ करने में विफल रही हैं. यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह के मुद्दे उठाए गए हैं. 2019 में भी प्रयागराज कुंभ के दौरान सीपीसीबी ने पानी की गुणवत्ता खराब होने की बात कही थी, जब 130.2 मिलियन लोग मेले में शामिल हुए थे.

-भारत एक्सप्रेस



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