Priyanka Gandhi Amit Shah Chanakya Remark: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चल रही चर्चा के दौरान शुक्रवार को एक ऐसा पल (Priyanka Gandhi and Amit Shah Parliament debate) आया, जिसने सदन के तनावपूर्ण माहौल को हंसी-मजाक में बदल दिया. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने जब गृह मंत्री अमित शाह को आधुनिक ‘चाणक्य’ बताते हुए उनकी राजनीतिक घेराबंदी की, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के सांसद अपनी हंसी नहीं रोक पाए. प्रियंका ने बिल की बारीकियों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘राजनीतिक चालाकी’ करार दिया.
‘अमित शाह की कुटिलता की दाद देते चाणक्य’
चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने बिल के ड्राफ्ट में बदलावों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2023 के मूल बिल में नई जनगणना का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान ड्राफ्ट में इसे हटाकर 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है. प्रियंका ने मुस्कुराते हुए अमित शाह की ओर देखा और कहा कि अगर आज चाणक्य जिंदा होते तो वे भी चौंक जाते… आपकी कुटिलता की दाद देते. गृह मंत्री जी हंस रहे हैं, पूरी तैयारी बना रखी है आपने.
इस टिप्पणी (Priyanka Gandhi and Amit Shah Parliament debate) पर अमित शाह भी अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक सके और देखते ही देखते पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा. प्रियंका ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह बिल महिला आरक्षण से ज्यादा राजनीतिक बिसात बिछाने के लिए लाया गया है.
क्यों ‘चाणक्य’ कहलाते हैं अमित शाह?
विपक्ष अक्सर परिसीमन (Delimitation) को लेकर यह डर फैलाता रहा है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी. लेकिन एक ‘चाणक्य’ की तरह अमित शाह ने अपनी तैयारी पूरी रखी थी. उन्होंने विपक्ष के हर काल्पनिक डर को आंकड़ों के जरिए ध्वस्त कर दिया:
दक्षिण की ताकत बढ़ेगी: शाह ने साफ किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की कुल सीटें 139 से बढ़कर 195 हो जाएंगी.
राज्यवार विस्तार: उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 और कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 हो जाएंगी.
भ्रम का अंत: शाह ने सीधे शब्दों में कहा कि दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की बात केवल एक ‘नरेटिव’ और भ्रम है, जबकि सच्चाई इसके ठीक उलट है.
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रणनीति ऐसी कि विपक्ष भी रह जाए हैरान
अमित शाह की ‘चाणक्य नीति’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे विवादित मुद्दों को भी बेहद स्पष्टता के साथ सदन में रखते हैं. महिला आरक्षण कानून (2023) को आधी रात को लागू करने से लेकर, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने के फैसले तक, शाह की हर चाल में एक दूरदर्शी सोच दिखाई देती है.
गृहमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार केवल कानून बनाना नहीं जानती बल्कि उसे बिना किसी राज्य के साथ भेदभाव किए, संवैधानिक तरीके से लागू करने का रोडमैप भी तैयार रखती है. यही वह आत्मविश्वास है जिसे देखकर विपक्षी नेता भी यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं कि “आज चाणक्य होते तो वो भी चौंक जाते.
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-भारत एक्सप्रेस
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