केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव. (फाइल फोटो)
रेल मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय रेलवे की स्वदेशी विकसित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ की स्थिति का जायजा लिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक में तैनाती की गति बढ़ाने और रेलवे संचालन को और सुरक्षित व कुशल बनाने के लिए नई तकनीक का अधिकतम लाभ उठाने पर जोर दिया.
क्या है ‘कवच’ और क्यों है इसकी चर्चा?
‘कवच’ भारत का अपना बनाया हुआ एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है. अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आ जाएं या लोको पायलट से सिग्नल देखने में कोई चूक हो जाए, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है.
कहां तक पहुंचे है हम?
रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक 3,103 किलोमीटर के रूट पर कवच को पूरी तरह फिट किया जा चुका है. वहीं, 24,427 किलोमीटर लंबी रेलमार्गों पर इसका विस्तार अभी चल रहा है, जिनमें हाई डेंसिटी और व्यस्त गलियारे शामिल हैं. दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे रूटों पर 1,638 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है.
दिल्ली-हावड़ा उच्च घनत्व गलियारे के प्रयागराज-कानपुर खंड के 190 किलोमीटर हिस्से पर कवच का निर्माण शुरू कर दिया गया है.
तकनीकी आधार मजबूत
सिस्टम की रीढ़ मानी जाने वाली तकनीक के तहत अब तक 8,921 किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई जा चुकी है. यह नेटवर्क 1,183 दूरसंचार टावरों और 767 स्टेशनों पर फैले कवच डेटा सेंटरों द्वारा समर्थित है. कवच की पहुंच इंजन तक भी हो चुकी है. इस समय 4,277 इंजनों में कवच लगाया जा चुका है और 8,979 इंजनों पर काम चल रहा है.
रेल मंत्रालय अगले दो सालों में कवच नेटवर्क को 9,000 रूट किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना बना रहा है. इसके बाद, सालाना 10,000 रूट किलोमीटर तक कवच को फैलाने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारत की रेलवे यात्रा और भी सुरक्षित, तेज़ और भरोसेमंद हो जाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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