ठाकरे बंधु
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे बंधुओं की साझा ताकत देखने को मिल रही है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संयुक्त आह्वान किया है. दोनों नेताओं ने मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में आगामी 4 अक्टूबर को मुंबई की सड़कों पर एक विशाल जनविरोध रैली निकालने की घोषणा की है.
चुनाव आयोग पर केंद्र की कठपुतली बनने का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने भारतीय चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं और मतदाताओं के विश्वास को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है. दोनों दलों का कहना है कि आयोग निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करने के बजाय केंद्र में सत्तारूढ़ दल के एक विस्तारक अंग (टूल) की तरह काम कर रहा है. नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और हेराफेरी के खिलाफ निर्णायक आंदोलन छेड़ने का संकल्प दोहराया.
पक्षपातपूर्ण राजनीति से परे, सामूहिक जन आंदोलन बनाने की तैयारी
प्रदर्शन की संगठनात्मक तैयारियों का नेतृत्व मनसे और शिवसेना (यूबीटी) मिलकर कर रहे हैं. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी एक दल का नहीं, बल्कि आम जनता और संपूर्ण राजनीतिक व्यवस्था का संयुक्त आंदोलन है. उन्होंने कहा, “यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं की शुचिता बचाने की निर्णायक लड़ाई है.” आयोजकों ने स्पष्ट किया कि वे सभी विपक्षी दलों से संपर्क कर एक बड़ा संयुक्त मोर्चा तैयार करेंगे.
बैलेट पेपर की वापसी और SIR रद्द करने की मांग
इससे पहले, मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने चल रही एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि संस्थागत प्रभाव के दम पर सत्ता हथियाने का खेल चल रहा है. ठाकरे बंधुओं ने ईवीएम व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए देश भर के विपक्षी दलों से कागजी मतपत्रों (बैलेट पेपर) की पुनः बहाली के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरने की अपील की है. 4 अक्टूबर की रैली के समय और सटीक स्थान की जानकारी जल्द साझा की जाएगी.
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