Bhilwara Hospital Deaths
Bhilwara Hospital Deaths: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में लगातार हो रही प्रसूताओं की मौतों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. पिछले दो महीनों में 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीज गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं. भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में हुई मौतों ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बीते सप्ताह भीलवाड़ा में पांच और बांसवाड़ा में चार महिलाओं की मौत हुई. वहीं, सात महिलाओं के किडनी प्रभावित होने के बाद डायलिसिस पर होने की जानकारी भी सामने आई. इन घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है और दोनों जिलों में विशेषज्ञ टीमों को भेजा गया है.
अलग-अलग कारणों से हुई मौत
भीलवाड़ा अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक मौत का कारण अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताएं थीं. अस्पताल के अनुसार किसी मरीज की मौत हार्ट अटैक, किसी की पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, तो अन्य की प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) और अन्य मेडिकल जटिलताओं के कारण हुई. ऑपरेशन थिएटर से नमूने लेकर संक्रमण की भी जांच की जा रही है.
‘बाकी बातें ब्रेक के बाद’ पर बवाल
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने शुरुआती जांच के आधार पर ऑपरेशन थिएटर संक्रमण और मौतों के बीच प्रत्यक्ष संबंध से इनकार किया है. हालांकि इसी बीच मंत्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जब उनसे लगातार हो रही मातृ मृत्यु और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा जाता है, तो वह मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘बाकी बातें ब्रेक के बाद.’ विपक्ष ने इस टिप्पणी को असंवेदनशील बताते हुए सरकार को घेरा है, जबकि यह वीडियो भी सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है.
अशोक गहलोत ने की जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इन मौतों पर चिंता जताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है. उनका कहना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं.
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि हर मौत का कारण अलग-अलग था, तो आखिर इतने कम समय में एक ही तरह के मामलों में लगातार मौतें क्यों हुईं? क्या सरकारी अस्पतालों में संसाधनों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, संक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था में कहीं बड़ी चूक है? जांच रिपोर्ट इन सवालों के जवाब देगी, लेकिन फिलहाल इन घटनाओं ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे और उसकी जवाबदेही दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
-भारत एक्सप्रेस
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