Ram Mandir Shri Ram Yantra installation: चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन और हिंदू नववर्ष के शुभ अवसर पर अयोध्या का राम मंदिर एक बार फिर अलौकिक आभा से जगमगा उठा. बुधवार सुबह ठीक 11 बजकर 55 मिनट पर, जब सूर्य की किरणें अपने चरम पर थीं तब ‘अभिजीत मुहूर्त’ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘श्री राम यंत्र’ की विधिवत स्थापना की. इस यंत्र की स्थापना को राम मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता का प्रतीक माना जा रहा है.
सोने जैसी चमक और अद्भुत तेज वाले इस यंत्र के दर्शन मात्र से भक्तों की आंखें चौंधिया गईं. मंत्रोच्चारण और शंखध्वनि के बीच जब राष्ट्रपति ने पूजन सामग्री भगवान के चरणों में अर्पित की, तो पूरा मंदिर प्रांगण भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर हो गया.
आठ दिनों के महायज्ञ के बाद ‘यंत्र राज’ की स्थापना
इस खास दिन के लिए अयोध्या में पिछले आठ दिनों से ‘श्री सीताराम राम जानकी यज्ञ’ का भव्य आयोजन किया जा रहा था. देशभर से आए विद्वान पुजारियों की देखरेख में चल रहे इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति आज ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना के साथ हुई. शास्त्रोक्त मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में यंत्र की स्थापना उसकी आध्यात्मिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है. राष्ट्रपति मुर्मू ने मंदिर के गर्भगृह में पूरी श्रद्धा के साथ इस दिव्य यंत्र का पूजन किया और इसे मंदिर के आधार स्तंभ के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया संपन्न की.
राष्ट्रपति मुर्मू और सीएम योगी की उपस्थिति में हुआ अनुष्ठान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गौरवशाली क्षण का वीडियो साझा किया है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाथ में दूब घास और पवित्र पूजन सामग्री से भरा पात्र लिए नजर आ रही हैं. उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ पूजन पात्र को अपने माथे से लगाया और फिर उसे मंदिर के पुजारियों को सौंप दिया, जिन्होंने मंत्रों के बीच उसे ईश्वर के चरणों में अर्पित किया.
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे. यंत्र की स्थापना के पश्चात राष्ट्रपति ने रामलला के दर्शन किए और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की.
सुनहरे तेज से चमका मंदिर
मंदिर प्रशासन के अनुसार, ‘श्री राम यंत्र’ का निर्माण विशेष धातुओं और प्राचीन विधियों से किया गया है. इसका सुनहरा रंग और उस पर उकेरी गई आकृतियां इतनी दिव्य हैं कि उसे देखना एक अलौकिक अनुभव बन गया है. जानकारों का कहना है कि आज से राम मंदिर का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से संपन्न मान लिया गया है. नवरात्रि के पहले दिन हुई इस स्थापना ने न केवल भक्तों के उत्साह को दोगुना कर दिया है, बल्कि अयोध्या की इस पावन भूमि पर एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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