Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

इस्तीफे के बाद भी ‘चंपत’ एक्टिव! राम मंदिर ट्रस्ट पर एक्शन क्यों नहीं? कानून का लूपहोल समझिए, संत क्यों मांग रहे एंट्री?

Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में खुलासा हुआ कि बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए MoU की धज्जियां उड़ गईं. दानपात्र खोलने के नियम तोड़े गए, निर्धारित सदस्य मौजूद नहीं थे, गणनाकर्मी बिना ड्रेस कोड के काम कर रहे थे और बैंककर्मियों की अनिवार्य मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई. जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या का राम मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि देश के सबसे चर्चित संस्थानों में भी गिना जाता है. मंदिर निर्माण से लेकर दान और चढ़ावे तक हर पहलू चर्चा का विषय बनता है. हाल ही में मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन और ट्रस्ट में नए सदस्य की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराया. पहली बार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पर आधिकारिक बयान जारी किया और बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है.

दान और चढ़ावे की सुरक्षा

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य चढ़ावे सुरक्षित हैं और उनका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है. हालांकि, यह विवाद तीन हफ्ते पहले सामने आया था और अब जाकर ट्रस्ट की ओर से प्रतिक्रिया आई है.

ट्रस्ट की स्थापना

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 9 नवंबर 2019 को हुआ. अदालत ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था. इसके बाद 5 फरवरी 2020 को संसद में इसकी घोषणा हुई. यह ट्रस्ट मंदिर निर्माण, वित्त और प्रशासन की देखरेख करता है और इसे स्वायत्त संस्था घोषित किया गया है.

सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार ने हाल ही में आरटीआई के जवाब में कहा कि ट्रस्ट के कामकाज में उसका कोई हस्तक्षेप नहीं है. सरकार ने केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ट्रस्ट बनाया और मस्जिद के लिए जमीन दी. इसके बाद ट्रस्ट अपने फैसले खुद लेता है.

संवैधानिक अधिकार

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है. इसी आधार पर राम मंदिर ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से प्रशासन, संपत्ति और संचालन से जुड़े फैसले लेता है.

सदस्य चयन प्रक्रिया

ट्रस्ट में नए सदस्य तब चुने जाते हैं जब कोई पद खाली हो. हाल ही में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद कृष्ण मोहन को सदस्य बनाया गया. हालांकि, विमलेंद्र प्रताप मिश्र की जगह अभी तक नया सदस्य नहीं चुना गया है. सभी सदस्यों का हिंदू होना अनिवार्य है.

प्रशासनिक ढांचा

ट्रस्ट के अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका केवल सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय तक सीमित है. मंदिर में करीब 35 दान पेटियां हैं, जिनकी गिनती एसबीआई और अधिकृत एजेंसियों की निगरानी में होती है.

सदस्य और उनकी जिम्मेदारी

ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान है, जिनमें फिलहाल 14 सदस्य हैं. इसमें संत-महंत, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी और सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं. महंत नृत्य गोपाल दास अध्यक्ष हैं, चंपत राय महासचिव और गोविंद देव गिरी कोषाध्यक्ष हैं.

सदस्यता समाप्त होने के नियम

किसी सदस्य की सदस्यता मृत्यु, इस्तीफा, दिवालिया घोषित होने, मानसिक अक्षमता या अपराध में दोषी पाए जाने पर खत्म हो सकती है. ट्रस्ट के हित में दो-तिहाई बहुमत से भी सदस्य हटाया जा सकता है. वरिष्ठ अधिवक्ता परासरन आजीवन सदस्य रहेंगे.

चोरी की जांच कैसे शुरू हुई?

दान में गड़बड़ी की खबरें जून की शुरुआत में आईं. जांच तब शुरू हुई जब ट्रस्ट ने खुद उत्तर प्रदेश सरकार से जांच कराने की सिफारिश की. इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की.

कानूनी जवाबदेही

ट्रस्ट स्वतंत्र है, लेकिन कानून से ऊपर नहीं. चोरी, धोखाधड़ी या गबन जैसे मामलों में पुलिस और अदालतें कार्रवाई कर सकती हैं.

हालिया विवाद

दान पेटियों से निकली रकम में हेराफेरी और सोने-चांदी की वस्तुओं में गड़बड़ी के आरोप लगे. पूर्व अकाउंट्स प्रभारी महिपाल सिंह ने खुलासा किया कि विरोध करने पर उन्हें हटाया गया. सीसीटीवी फुटेज मिटाने और कर्मचारियों की संपत्ति खरीदने के आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया.

ये भी पढ़ें-‘ठीकरा कर्मचारी पर क्यों, आप क्या कर रहे थे?’ राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हरिद्वार के संतों ने चंपत राय को घेरा

अब तक की कार्रवाई

एसआईटी ने जांच के बाद रिपोर्ट दी और एफआईआर दर्ज हुई. आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया. इसी बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया. इसपर मस्त हेडलाइन बनाकर दें.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital