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मेरठ में कथा सुनाते रामभद्राचार्य महाराज बोले- “ये क्षेत्र मिनी पाकिस्तान जैसा..”, इस्लामी गुरु हुए खफा, जानें क्या कहा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस क्षेत्र को “मिनी पाकिस्तान” जैसा बताया है. इस बयान से इस्‍लामी धर्मगुरु खफा हो गए हैं.

उत्तर प्रदेश के मेरठ में कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस क्षेत्र को “मिनी पाकिस्तान” जैसा बताया है. इस बयान से इस्‍लामी धर्मगुरु खफा हो गए हैं. रामभद्राचार्य के इस बयान पर मुस्लिम धर्मगुरु चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने रामभद्राचार्य के बयान को अस्वीकार्य बताते हुए भारत को ‘फूलों का गुलदस्ता’ बताया. हुसैन ने कहा, “यह एकदम फिजूल व बेबुनियाद बात है. हमारा हिंदुस्तान फूलों का गुलदस्ता है. ये कभी भी पाकिस्तान नहीं बन सकता. पाकिस्तान हमारा शत्रु देश है और वो शत्रु ही रहेगा. हमारा देश महान है, वो महान ही रहेगा.”

‘पाक से क्रिकेट तो क्या, कोई भी संबंध नहीं होना चाहिए’

चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने पाकिस्तान के साथ किसी भी संबंध, यहां तक कि क्रिकेट तक को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान से क्रिकेट क्या, कोई भी संबंध नहीं होना चाहिए. यह देश हमेशा से हमारे देश को नुकसान पहुंचाता रहा है. नुकसान पहुंचाने की साजिश में लगा रहता है. भारत सरकार को पाकिस्तान के साथ सभी संबंध समाप्त करने की मैं मांग करता हूं.”

‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग पर मौलाना हुसैन ने जताया ऐतराज

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) के ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग पर मौलाना हुसैन ने ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि बागेश्वर बाबा का ये कहना कि हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, ये उनका बचपना है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हिंदू राष्ट्र जैसा कोई मामला ही नहीं है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वो मोहन भागवत की बातों को चुनौती दे रहे हैं?

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‘यह भारत का हिस्सा है, यहां के सभी लोग भारतीय’

वहीं, सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि यह उनकी निजी सोच हो सकती है, लेकिन इस क्षेत्र के लोग इसे भारत का अभिन्न अंग मानते हैं. हम यहीं पैदा हुए, यहीं रहे. यह भारत का हिस्सा है और यहां के सभी नागरिक भारतीय हैं. हम संविधान में विश्वास रखते हैं. संविधान के खिलाफ कही गई किसी भी बात का न तो समर्थन करते हैं, न स्वीकार करते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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