भारतीय करेंसी (रुपये) को लेकर एक दिलचस्प खबर है. आपकी जेब में रखे नोट न तो पानी में भीगकर गलेंगे और न ही आसानी से फटेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में प्लास्टिक यानी पॉलिमर के नोट चलाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. केंद्रीय बैंक ने इसके लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर भी जारी कर दिया है.
शुरुआत में ₹10 और ₹20 के नोटों के साथ इसका फील्ड ट्रायल (प्रायोगिक परीक्षण) शुरू किया जाएगा, और सब कुछ ठीक रहा तो साल 2027 तक पूरे देश में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक नोटों को फुल-स्केल पर लॉन्च कर दिया जाएगा.
फटे-मैले नोटों की समस्या से मिलेगा छुटकारा
अक्सर आम लोगों को रोजमर्रा के लेन-देन में फटे, पुराने या बेहद गंदे नोट मिल जाते हैं, जिन्हें दुकानदार लेने से मना कर देते हैं. ऐसे नोट न सिर्फ आम जनता के लिए सिरदर्द बनते हैं, बल्कि इन्हें चलन से बाहर कर नष्ट करना आरबीआई के लिए भी एक बड़ी और खर्चीली चुनौती है.
आंकड़ों की बात करें तो अकेले वित्त वर्ष 2025 में ही आरबीआई द्वारा 23.8 अरब (2,380 करोड़) गंदे और फटे नोट चलन से बाहर किए गए. यह आंकड़ा इससे पिछले साल के मुकाबले 12.3 प्रतिशत ज्यादा है. हैरान करने वाली बात यह है कि नष्ट किए गए नोटों में सबसे बड़ी संख्या 500 रुपये और उसके बाद 100 रुपये के नोटों की थी. प्लास्टिक के नोट आने से यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी क्योंकि इनकी लाइफ सामान्य कागज के नोटों से 4 से 5 गुना ज्यादा होती है.
भारतीय रिजर्व बैंक हर साल कितने नोट छापता है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल अरबों की संख्या में नए नोट छापता है. एक अनुमान के मुताबिक, आरबीआई हर साल लगभग 25 से 30 अरब नए बैंक नोट अपनी अलग-अलग करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में तैयार करता है. हालांकि, जितनी संख्या में नए नोट बाजार में आते हैं, लगभग उतनी ही संख्या में पुराने और कटे-फटे नोटों को वापस लेकर नष्ट भी किया जाता है. प्लास्टिक नोटों की छपाई शुरू होने से बार-बार नोट छापने का सरकारी खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा.

इन देशों में पहले से चल रही है प्लास्टिक करेंसी
दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों ने कागज के नोटों की जगह बहुत पहले ही प्लास्टिक (पॉलिमर) करेंसी को अपना लिया है.
देश / प्लास्टिक नोट कब शुरू हुए? / विशेषता
ऑस्ट्रेलिया 1988 – (दुनिया में सबसे पहले) पूरी तरह वाटरप्रूफ
न्यूजीलैंड 1999 – जाली नोट बनना नामुमकिन हो गया
रोमानिया 1999 – टिकाऊपन में सबसे आगे
वियतनाम 2003 – गंदे और फटे नोटों से पूरी तरह मुक्ति
कनाडा 2011 – ठंडे मौसम के अनुकूल और बेहद सुरक्षित
ब्रिटेन (UK) 2016 – ₹5 और ₹10 के पाउंड नोटों से शुरुआत
भारत भी अब इसी लीग में शामिल होने जा रहा है. प्लास्टिक करेंसी आने से न सिर्फ देश में जाली नोटों (काउंटरफीड) के धंधे पर पूरी तरह लगाम लगेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को एक नया और साफ-सुथरा रूप मिलेगा.
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