Republic Day 2026: हर साल 26 जनवरी को जब दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हिंदुस्तान अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करता है, तो पूरी दुनिया की नजरें तिरंगे के साथ खड़ी उस एक शख्सियत पर भी होती हैं, जो भारत के ‘मुख्य अतिथि’ होते हैं.
इस बार भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और यह साल कूटनीति के लिहाज से बेहद खास है. गणतंत्र दिवस के इस भव्य मंच पर कौन बैठेगा, इसका फैसला कोई रातों-रात नहीं लिया जाता, बल्कि इसके पीछे महीनों की लंबी प्लानिंग, कूटनीति की बिसात और एक बहुत ही गोपनीय प्रक्रिया होती है.
विदेश मंत्रालय के गलियारों में यह कवायद कार्यक्रम से करीब 6 महीने पहले ही शुरू हो जाती है, जहाँ भारत के विभिन्न देशों के साथ बदलते रिश्तों और भविष्य की संभावनाओं का बारीक मूल्यांकन किया जाता है.
कैसे बनती है लिस्ट?
इस चयन प्रक्रिया की शुरुआत विदेश मंत्रालय द्वारा उन राष्ट्राध्यक्षों की एक सूची तैयार करने से होती है, जिनके साथ भारत के सामरिक, सैन्य और आर्थिक संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हों. यह सूची सिर्फ दोस्ती के आधार पर नहीं, बल्कि ‘जरूरत’ और ‘संदेश’ के आधार पर बनती है.
जब मंत्रालय अपनी सिफारिशें तैयार कर लेता है, तो यह फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचती है और फिर राष्ट्रपति की अंतिम मुहर लगने के बाद ही नाम फाइनल होता है. लेकिन न्योता आधिकारिक रूप से भेजने से पहले बहुत ही सावधानी और गोपनीयता के साथ संबंधित देश में भारतीय राजदूत के जरिए मेहमान की उपलब्धता का पता लगाया जाता है, ताकि किसी भी तरह की कूटनीतिक असहजता से बचा जा सके.
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‘आत्मनिर्भर’ भारत का संकल्प
साल 2026 के इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने मध्य एशिया के साथ अपने बढ़ते सामरिक और ऊर्जा संबंधों को मजबूती देते हुए कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है. इस बार के गणतंत्र दिवस की थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प और देश की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी को समर्पित है.
यह चुनाव न केवल भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्सटेंडेड नेबरहुड’ नीति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी भू-राजनीतिक भूमिका को लेकर कितना स्पष्ट और गंभीर है.
दुनिया को भारत का बड़ा संदेश
एक बार जब विदेशी मेहमान की ओर से सहमति मिल जाती है, तो रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां उनके शाही स्वागत की तैयारियों में जुट जाती हैं.
मेहमान को दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी, गार्ड ऑफ ऑनर और उनकी सुरक्षा का अभेद्य घेरा सिर्फ एक प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि भारत की ‘अतिथि देवो भव:’ की महान परंपरा का जीवंत रूप है.
यह आयोजन दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अपने लोकतंत्र का उत्सव मनाते समय अपने वैश्विक साझेदारों को कितनी अहमियत देता है और कैसे एक न्योता दुनिया की राजनीति में बड़े बदलावों की बुनियाद रख सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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