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संघ का मकसद सत्ता नहीं, समाज का संगठन; मेरठ में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) मेरठ पहुंचे और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद किया. उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि हिंदू समाज को संगठित करना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) गुरुवार को मेरठ पहुंचे. यहां मेरठ और बृज प्रांत के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान उन्होंने (Mohan Bhagwat) कहा कि संघ का काम अपना नाम बड़ा करना नहीं बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है.

संघ का उद्देश्य

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने स्पष्ट किया कि संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या सत्ता हासिल करने के लिए नहीं बना है. इसका असली मकसद हिंदू समाज को संगठित करना है. उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए उसे भीतर से जानना जरूरी है और इसमें किसी तरह की राजनीतिक स्पर्धा की आकांक्षा नहीं है.

मेरठ की ऐतिहासिक पहचान

संघ प्रमुख (Mohan Bhagwat) ने मेरठ को स्वतंत्रता संग्राम की धरती बताते हुए कहा कि यहीं से पहली क्रांति की शुरुआत हुई थी. उन्होंने चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों का उल्लेख किया. साथ ही बताया कि कांग्रेस ने राजनीतिक जागरूकता का काम किया, जबकि समाज सुधार की अलग धारा भी चली. इन्हीं परिस्थितियों में 1925 में डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की.

हिंदू शब्द पर विचार

उन्होने (Mohan Bhagwat) कहा कि भारत भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, विवेकानंद, दयानंद और गांधी का देश है. उन्होंने हिंदू शब्द को जाति नहीं बल्कि सांस्कृतिक विशेषण बताया. विविधता में एकता को उन्होंने भारतीय संस्कृति का मूल तत्व कहा. उन्होंने बताया कि संघ आज देशभर में 45 प्रांतों में 1.30 लाख से अधिक सेवा प्रकल्प चला रहा है.

खिलाड़ियों के सवाल

संवाद के दूसरे सत्र में करीब 90 खिलाड़ियों ने प्रश्न पूछे. हाथरस के पहलवान हरिकेश ने पारंपरिक खेलों और ग्रामीण प्रतिभाओं पर सवाल किया. इस पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ स्वयं कुछ नहीं करता, बल्कि स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर योजना बनाकर काम करते हैं. उन्होंने (Mohan Bhagwat) कहा कि क्रीड़ा भारती पहल करे, संघ सहयोग करेगा.

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भारत को खेल महाशक्ति बनाने के सवाल पर उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विकेंद्रीकरण पर जोर दिया. युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्होंने परिवार और समाज में संस्कारों को मजबूत करने की बात कही. हिंदू राष्ट्र पर उन्होंने कहा कि भारत सांस्कृतिक रूप से हिंदू राष्ट्र है और यहां समरसता का भाव प्रमुख है. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत फिर से विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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