संघ प्रमुख मोहन भागवत
Mohan Bhagwat On BJP President Election: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच के संबंधों को लेकर अक्सर बहस चलती रहती है. एक आम धारणा है कि बीजेपी के सारे बड़े फैसले, खासकर पार्टी अध्यक्ष का चयन, संघ ही करता है. अब, आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने इस पर खुलकर बात की है. दिल्ली में एक कार्यक्रम में भागवत ने सीधे तौर संघ और बीजेपी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप पर अपनी बात रखी है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि बीजेपी सरकार चलाने और अपने फैसले लेने में पूरी तरह से स्वतंत्र है. मैं साखा चलाने में एक्सपर्ट हूं उसपर मुझे कोई सलाह दे सकता है.
भाजपा अध्यक्ष के चयन में संघ की भूमिका (Role RSS In BJP President Election)
भाजपा अध्यक्ष के चयन में हो रही देरी पर भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर हम सब कुछ तय कर रहे होते, तो क्या इसमें इतना समय लगता? यह बात साफ तौर पर दर्शाती है कि संघ भाजपा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है. भागवत ने कहा कि संघ सिर्फ सुझाव दे सकता है, लेकिन भाजपा के निर्णय लेने की प्रक्रिया में कभी हस्तक्षेप नहीं करता.
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मतभेद का मतलब झगड़ा नहीं
अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इसका मतलब झगड़ा नहीं है. उन्होंने कहा कि संघ और भाजपा एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, लेकिन मुद्दों पर मतभेद स्वाभाविक हैं. उन्होंने कहा कि संघ प्रयोगों की अनुमति देता है और अगर परिणाम अच्छे होते हैं, तो सभी स्वीकार करते हैं. संघ केंद्र और राज्य प्रशासन के साथ अच्छा समन्वय स्थापित करता है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का हो.
अटकलों पर लगाया विराम (Mohan Bhagwat On BJP RSS relationship)
मोहन भागवत का यह बयान उन सभी अटकलों पर विराम लगाता है जो बीजेपी के अध्यक्ष पद को लेकर चल रही थीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ और भाजपा के बीच गहरा विश्वास है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संघ बीजेपी के फैसलों पर नियंत्रण रखता है. उनका यह बयान बीजेपी नेतृत्व को स्वायत्तता देने की बात पर जोर देता है, और यह भी दिखाता है कि दोनों संगठनों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद होना स्वाभाविक है. हालांकि, भागवत ने जोर देकर कहा कि ऐसे मतभेदों का मतलब झगड़ा नहीं होता, बल्कि यह एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है.
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