sadhguru himalayan board proposal- bharat express
Sadhguru Himalayan Board Proposal: आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हिमालय से जुड़े देशों के बीच बेहतर सहयोग और समन्वय के लिए एक ‘हिमालयन बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव दिया है. इसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को शामिल करने की बात कही गई है. उनका कहना है कि हिमालय किसी एक देश की राजनीतिक सीमा तक सीमित नहीं है, इसलिए इस पर्वतीय क्षेत्र से जुड़े फैसलों में भी देशों को साथ मिलकर विचार करना चाहिए.
राजनीतिक सीमाओं से परे सोचने की जरूरत
सद्गुरु ने कहा कि हिमालय को राजनीतिक सीमाओं के नजरिए से देखने के बजाय साझा प्राकृतिक विरासत के तौर पर समझने की जरूरत है. उनके मुताबिक, पहाड़ों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस क्षेत्र की राजनीतिक व्यवस्था क्या है या वहां कौन-सी भाषा बोली जाती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भले ही इन देशों के लिए हिमालय का प्रशासन एक साझा संस्था के माध्यम से करना संभव न हो, लेकिन कम से कम आपसी परामर्श और समन्वय की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए.
भारत, चीन, पाकिस्तान समेत 5 देश हों शामिल
प्रस्तावित हिमालयन बोर्ड में भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को शामिल करने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य हिमालय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर इन देशों के बीच बातचीत और साझा रणनीति को बढ़ावा देना होगा. सद्गुरु के अनुसार, हिमालय का प्रभाव केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां इसकी पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं. यह पर्यावरण, जल संसाधनों और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक तंत्र है. ऐसे में इसके संरक्षण के लिए सीमाओं से ऊपर उठकर सहयोग जरूरी है.
हिमालय शानदार भी है और बेहद नाजुक भी
सद्गुरु ने हिमालय को धरती की सबसे शानदार और भव्य प्राकृतिक संरचनाओं में से एक बताया. साथ ही उन्होंने इसकी संवेदनशीलता पर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि हिमालय बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ बहुत नाजुक पर्वतीय तंत्र भी है. उन्होंने कहा कि यहां होने वाली गतिविधियों का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ सकता है. इसलिए हिमालय से जुड़े देशों के बीच नीतियों और कार्यों में एकरूपता या कम से कम बेहतर तालमेल होना जरूरी है.
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साझा प्रयास से संरक्षण पर जोर
सद्गुरु के प्रस्ताव का मुख्य केंद्र हिमालय के संरक्षण के लिए साझा प्रयास करना है. उनका मानना है कि अलग-अलग देशों द्वारा अपने स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ आपसी संवाद भी जरूरी है. उन्होंने हिमालय को राजनीतिक विवादों से अलग रखते हुए प्राकृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की. उनके मुताबिक, पहाड़ सीमाओं को नहीं पहचानते, इसलिए हिमालय की सुरक्षा और संरक्षण के लिए देशों को भी सहयोग की भावना से आगे बढ़ना चाहिए.
भारत एक्सप्रेस
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