देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस एक बार फिर जमीन पर उतरने की तैयारी में है. इस बार मुद्दा है ‘MGNREGA’, जिसे कांग्रेस अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानती है. पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, और इसी के विरोध में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. पार्टी ने इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए एक ऐसी ठोस कार्य योजना तैयार की है, जो सीधे ग्रामीण भारत की नब्ज को छूने की कोशिश करेगी.
सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों व सचिवों को निर्देश
दरअसल, अभियान की कमान संभाल रही कांग्रेस की समन्वय समिति ने हाल ही में 5 जनवरी को एक अहम बैठक की थी, जिसमें इस आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया. पार्टी ने अपने सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 8 जनवरी तक हर हाल में जमीनी स्तर की समितियों के साथ जरूरी दस्तावेज साझा कर दें. कांग्रेस की रणनीति इस बार केवल शहरों तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि वह ब्लॉक और पंचायत स्तर तक जाकर सरकार को घेरना चाहती है.
प्रचार के लिए खास पैम्फलेट
आंदोलन को धार देने के लिए कांग्रेस ने प्रचार सामग्री पर भी काफी बारीकी से काम किया है. पार्टी ने एक पन्ने का एक खास पैम्फलेट तैयार किया है, जिसे स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करके गांव-गांव बांटने की योजना है. इस अभियान की शुरुआत 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ होगी. इसके अगले ही दिन यानी 11 जनवरी को पूरे देश में राज्यव्यापी धरने आयोजित किए जाएंगे. लेकिन इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 12 से 29 जनवरी के बीच होने वाली ‘पंचायत चौपालें’ होंगी, जहां पार्टी कार्यकर्ता सीधे मजदूरों और ग्रामीणों से संवाद करेंगे.
गावं कर रहें विरोध?
रणनीति का एक और दिलचस्प पहलू 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से जुड़ा है. कांग्रेस ने एक विशेष प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है, जिसे देशभर की ग्राम सभाओं में चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. इसके जरिए कांग्रेस ये संदेश देना चाहती है कि मनरेगा में हो रहे बदलावों का विरोध सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि खुद गांव की जनता कर रही है.
राज्यों में तैयारी बैठकें अभियान की नींव
8 जनवरी को राज्यों की राजधानियों में होने वाली तैयारी बैठकें इस पूरे अभियान की नींव होंगी. इन बैठकों में न केवल सामग्री की छपाई और अनुवाद का काम पूरा किया जाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि 11 जनवरी के इस विरोध प्रदर्शनों की जगह और समय तय हो. कांग्रेस का लक्ष्य साफ है, कि उनका यह प्रस्ताव देश की हर ग्राम सभा तक पहुंचे और लोग अपनी आवाज बुलंद करें.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

