जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में उस समय बवाल मच गया. जब ढेर सारे लोग हजरतबल दरगाह में नवनिर्मित शिलापट्ट के पास जमा हो गए और उसपर लगे राष्ट्रीय प्रतीक को पत्थरों और ईंटों से तोड़कर हटा दिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
शुक्रवार को नमाज के बाद स्थानीय लोगों ने शिलापट्ट पर उकेरे गए अशोक स्तंभ पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया और इसे तोड़कर हटा दिया. इस दौरान लोग धार्मिक नारे लगाते भी देखे गए. वहीं स्थानीय नेताओं और लोगों ने भी इस राष्ट्रीय प्रतीक को धार्मिक भावना आहत करने वाला बताया.
WATCH | कट्टरता की हद.. राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी नहीं बर्दाश्त! भीड़ ने श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में ईंट से अशोक चिह्न को तोड़ा#JammuKashmir #DargahHazratbalShrine #AshokaEmblem #DargahHazratbal pic.twitter.com/vK3rcjeZsI
— YSS Group (@yss_group) September 5, 2025
हाल ही में किया गया मस्जिद का रिनोवेशन
दरअसल हाल ही में मस्जिद का रिनोवेशन किया गया था, जिसका उद्घाटन जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने किया था. शुक्रवार की घटना को अंद्राबी ने संविधान पर चोट करने वाला बताया. उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीक को तोड़ने वालों को आतंकी तक करार दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक को हटाने वालों के खिलाफ PSA के तहत कार्रवाई होनी चाहिये.
धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ का आरोप
वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य विपक्षी दलों इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाला बताया. PDA नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर उकसाया जा रहा है.
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“…फिर दरगाह में ना लेकर जाएं नोट”
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि जब भी विधायक दरगाह जाएं तो उनकी पूरी तसल्ली से तलाशी ली जाए कि कहीं उनके जेब में नोट ना मिल जाए. क्योंकि उसे अंदर ले जाना गलत होगा. जिन लोगों को राष्ट्रीय प्रतीकों से समस्या है वो नोटों को दरगाह में ना ले जाएं.
हजरतबल दरगाह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में डल झील के किनारे पर मौजूद है. कहा तो यहां तक जाता है कि इस जगह पर ही इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब का बाल रखा हुआ है. इस बाल को मुई-ए-मुकद्दस कहा जाता है. बाल इस मस्जिद में 1699 में लाया गया था. इसे विशेष अवसरों पर जनता के सामने लाया जाता है.
– भारत एक्सप्रेस
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