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अब चुप नहीं बैठेगी नई पीढ़ी! Gen-अल्फा के इस तेवर को देख दो राज्यों का प्रशासन अलर्ट, मिनटों में मानी मांग

देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूली बच्चों से जुड़ी दो घटनाओं ने यह दिखाया है कि नई पीढ़ी अब अपनी परेशानियों को लेकर चुप रहने के बजाय सीधे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने लगी है.

देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूली बच्चों से जुड़ी दो घटनाओं ने यह दिखाया है कि नई पीढ़ी अब अपनी परेशानियों को लेकर चुप रहने के बजाय सीधे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने लगी है. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बच्चे स्कूल तक पक्की सड़क की मांग लेकर तिरंगा हाथ में उठाकर करीब पांच किलोमीटर पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे. वहीं, उत्तराखंड के खटीमा में आवासीय विद्यालय के छात्रों ने खराब भोजन, दूषित पानी और गंदे शौचालय जैसी समस्याओं को लेकर स्कूल परिसर में धरना दिया है.

दोनों मामलों में छात्रों की शिकायतें प्रशासन तक पहुंचीं और इसके बाद कार्रवाई का भरोसा भी मिला है.

हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण लंबे समय से खराब सड़क की समस्या झेल रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें रोज इसी कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है.

बारिश के दिनों में हालात और मुश्किल हो जाते हैं. रास्ते में कीचड़ जमा होने के कारण बच्चों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है. इसी समस्या को लेकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने विरोध का रास्ता चुना.

बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर की यात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे. वहां उन्होंने सड़क बनवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की और डीएम गेट के पास बैठ गए. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होता, वे वहां से नहीं हटेंगे.

बच्चों के साथ उनके अभिभावक और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे. उन्होंने प्रशासन को बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है और लंबे समय से स्कूल तक जाने वाला रास्ता खराब पड़ा हुआ है.

प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया. एसडीएम और सीओ सदर भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की.

सड़क निर्माण पर करीब 1.81 करोड़ रुपये होंगे खर्च

हमीरपुर के एडीएम राकेश कुमार के मुताबिक, छात्रों और ग्रामीणों ने कच्ची सड़क को पक्का कराने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया है. उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से जरूरी एनओसी मिल चुकी है.

प्रशासन के अनुसार, अब सड़क का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 1 करोड़ 81 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. यानी जिस सड़क को लेकर बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट तक पहुंचे थे, उसके निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है.

हालांकि, बच्चों और ग्रामीणों के लिए असली राहत तभी होगी, जब सड़क का काम जमीन पर शुरू होकर समय पर पूरा होगा.

खटीमा में स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों का धरना

दूसरी घटना उत्तराखंड के खटीमा की है, जहां सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. सोमवार शाम छात्रों ने विद्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया. उनका आरोप था कि उन्हें अच्छी गुणवत्ता का भोजन नहीं मिल रहा है. इसके अलावा दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी जैसी समस्याएं भी सामने आ रही थीं.

बताया गया कि दोपहर से ही छात्र धीरे-धीरे स्कूल परिसर में जुटने लगे थे. बाद में कई अभिभावक भी बच्चों के समर्थन में धरने में शामिल हो गए. छात्रों ने अपनी समस्याओं की जांच कराने और स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार करने की मांग की. अभिभावकों ने प्रधानाचार्य पर अभद्र व्यवहार करने और शिकायत करने पर धमकाने जैसे आरोप भी लगाए. छात्रों का कहना था कि समस्याओं को लेकर पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जरिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची. मुख्यमंत्री ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया और विद्यालय की प्रधानाचार्य भारती यादव को हटाने का आदेश दिया.

व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन मिलने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों ने धरना समाप्त कर दिया. इसके बाद छात्रों ने मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे भी लगाए. खटीमा मुख्यमंत्री धामी का गृह नगर भी है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर छात्रों के इस प्रदर्शन को लेकर काफी चर्चा हुई.

विद्यालय में पढ़ते हैं करीब 400 छात्र

खटीमा के इस एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में कक्षा छह से 12वीं तक के करीब 400 जनजातीय समुदाय के छात्र पढ़ते हैं. छात्रों की शिकायतों में भोजन की गुणवत्ता, पानी की समस्या और शौचालयों की साफ-सफाई प्रमुख मुद्दे रहे.

इन दोनों घटनाओं को देखें तो बच्चों की समस्याएं अलग-अलग थीं, लेकिन एक बात समान रही कि छात्रों ने अपनी बात सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का फैसला किया.

हमीरपुर में बच्चों की मांग स्कूल तक बेहतर और सुरक्षित रास्ते की थी, जबकि खटीमा में छात्र अपने विद्यालय के भीतर मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशान थे. एक जगह तिरंगा लेकर निकली यात्रा प्रशासन का ध्यान खींचने का जरिया बनी, तो दूसरी जगह स्कूल परिसर में धरने के जरिए छात्रों ने अपनी नाराजगी जताई है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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