पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के नौशेरा जिले में स्थित अकोरा खट्टक के प्रसिद्ध इस्लामिक मदरसे दारुल उलूम हक्कानिया में शुक्रवार को एक आत्मघाती विस्फोट हुआ. इस हमले में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के समीउल हक धड़े के प्रमुख मौलाना हमीदुल हक हक्कानी समेत पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए.
पुलिस की जांच और सुरक्षा अलर्ट
पुलिस के अनुसार, धमाके के बाद घटनास्थल पर आत्मघाती हमलावर के शरीर के अवशेष मिले हैं. बम निरोधक दस्ते ने इलाके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं ताकि हमले की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की जानकारी हासिल की जा सके. खैबर पख्तूनख्वा के स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार एहतेशाम अली ने बताया कि पेशावर, मर्दन और नौशेरा के सभी अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया है.
निशाने पर थे मौलाना हमीदुल हक हक्कानी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मघाती हमले का मुख्य निशाना मौलाना हमीदुल हक हक्कानी थे, जो न केवल जेयूआई-एस के प्रमुख थे, बल्कि मदरसे के प्रशासक भी थे. उनके पिता, मौलाना समीउल हक को 2018 में उनके घर पर चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी. समीउल हक को “तालिबान के गॉडफादर” भी कहा जाता था, क्योंकि उनके मदरसे से तालिबान के कई बड़े नेताओं ने शिक्षा प्राप्त की थी.
तालिबान और मदरसे का कनेक्शन
दारुल उलूम हक्कानिया की स्थापना 1947 में मौलाना अब्दुल हक हक्कानी ने की थी और इसे कट्टरपंथी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जोड़ा जाता रहा है. इसी मदरसे से तालिबान नेता अमीर खान मुत्ताकी, अब्दुल लतीफ मंसूर, मुल्ला जलालुद्दीन हक्कानी समेत कई चरमपंथी नेताओं ने पढ़ाई की थी.
बेनजीर भुट्टो की हत्या से संबंध?
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में भी इस मदरसे के कुछ छात्रों के नाम सामने आए थे, हालांकि मदरसे ने इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था.
फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी संगठन ने नहीं ली है. सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं और मदरसे के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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