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सुप्रीम कोर्ट में किसानों के प्रदर्शन पर सुनवाई टली, अगली बैठक 19 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन पर सुनवाई टली, अगली बैठक 19 मार्च को होगी. कोर्ट ने मेडिकल सहायता रोकने को अपराध बताया, वहीं किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए बनी समिति की सराहना की.

Supreme Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

एमएसपी सहित अन्य मांगों को लेकर खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी हैं. अगली बैठक 19 मार्च को होनी है. जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया है.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की बेंच किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के संबंध में पंजाब सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग करने वाली याचिककताओं सहित अन्य याचिका पर अगली तारीख पर सुनवाई करेगा. वही पंजाब सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि बैठक में राज्य के दो मंत्रियों ने किसानों के साथ हुई बैठकों में भाग लिया था. कोर्ट ने प्रदर्शनकारी किसानों की शिकायतों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए गठित उच्चाधिकारी प्राप्त समिति के काम की सराहना की है.

किसानों के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्त की नाराजगी

कोर्ट ने समिति के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त) नवाब सिंह, और अन्य सदस्यों के लिए पारिश्रमिक निर्धारित करने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस मामले में गठित अध्यक्ष को प्रति बैठक 2 लाख और एक अन्य सदस्य को एक लाख रुपये प्रति बैठक देने को कहा है. पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि डल्लेवाल ने केंद्र सरकार से बातचीत के बाद चिकित्सा सहायता स्वीकार कर ली है. पिछली सुनवाई में किसान नेता और किसानों के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि एक बीमार व्यक्ति (डल्लेवाल) को ईलाज ले जाने से रोकना क्रिमनल ऑफेंस है. वही जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा था कि किसी को मेडिकल के लिए हॉस्पिटल ले जाने से रोकना आत्महत्या के लिए उकसाने के समान है.

-भारत एक्सप्रेस



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