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आईआईटी और आईआईएम जैसे शिक्षण संस्थानों में खुदकुशी की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्त की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी और आईआईएम में आत्महत्याओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इन मामलों की जांच के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Edited by Akansha

आईआईटी और आईआईएम जैसे शिक्षण संस्थानों में खुदकुशी की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, इसके लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी की है. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि 14 महीने में आईआईटी और आईआईएम में 18 आत्महत्या की घटनाएं सामने आई है. जिसपर कोर्ट ने कहा कि जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हम इस स्थिति की जांच के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाएगा.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश जयसिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों ने अदालत के आदेश के बावजूद अपने परिसर में होने वाली आत्महत्याओं से संबंधित आंकड़ा अभी तक नही दिया है. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मसौदा विनियम तैयार किए है, जो याचिककताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं को संबोधित करते है और इसे जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करते हुए अपनी वेबसाइट पर डाला गया है. याचिकाकर्ता के वकील जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि 40 फीसदी विश्विद्यालय और 80 फीसदी कॉलेजों ने अपने परिसर में समान अवसर प्रकोष्ठ स्थापित नहीं किया है.

कोर्ट ने यूजीसी को इन सुझावों पर विचार करने का दिया निर्देश

इसपर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से मसौदा विनियमों पर सुझाव देने को कहा और यूजीसी को इन सुझावों पर विचार करने का निर्देश दिया. यह याचिका रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माँ की ओर से संयुक्त रूप से जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट यूजीसी को इस बावत निर्देश जारी करें ताकि उच्च शैक्षिक संस्थानों के नियमन 2012 को सख्ती से लागू किया जा सके. याचिका में यह भी मांग की गई है कि विश्व विद्यालयों और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों- शिक्षकों को समान अवसर मुहैया कराने के लिए विशेष सेल बनाए जाएं.

देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव कायम

याचिका में कहा गया है कि इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों, शिक्षकों या कर्मचारियों के साथ भेदभाव की आंतरिक शिकायतों से समय पर निपटारे में मदद मिलेगी. याचिका में यह भी मांग की गई है कि शिक्षण संस्थाओं में एससी-एसटी छात्र -छात्राओं के लिए कोचिंग क्लास और ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए. याचिका में कहा गया है कि देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव कायम है.

याचिका में कही गई ये बात

याचिका में कहा गया है कि ये घटनाएं संविधान की धारा 14, धारा 15, धारा 16, धारा 17 और धारा 21 के तहत प्रदत समता, समानता, भेदभाव के खिलाफ अधिकार, छुआछूत का अंत और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती है. बता दें कि महाराष्ट्र के नायर अस्पताल के टॉपिकल नेशनल मेडिकल कॉलेज में गायनोकोलॉजी एंड ऑब्स्टेटिक्स में पढ़ने वाली डॉक्टर पायल तड़वी ने आत्महत्या कर ली थी. पायल अपने वरिष्ठ डॉक्टरों की प्रताड़ना से तंग थी.

ये डॉक्टर उस पर जातिगत टिप्पणी कर अक्सर परेशान करते थे. डॉक्टर पायल तड़वी की शादी 2016 में डॉक्टर सलमान से हुई थी. जबकि हैदराबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के पीएचडी स्कॉलर वेमुला 17 जनवरी 2016 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वेमुला को दुर्व्यवहार के कारण विश्वविद्यालयसस्पेंड कर दिया था जिसके कुछ दिन बाद वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी.

-भारत एक्सप्रेस 



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