Bharat Express DD Free Dish

देशभर में जमींदोज हो सकती हैं करोड़ों इमारतें, कहीं आपके मकान पर तो नहीं चलेगा बुलडोजर? जानें SC का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी संपत्तियों के नियमों के खिलाफ कमर्शियल इस्तेमाल पर सख्ती के निर्देश दिए हैं.

Supreme Court News: देशभर में रिहायशी इलाकों में घरों और संपत्तियों का नियमों के खिलाफ व्यावसायिक इस्तेमाल अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को नियम तोड़ने वाली संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद दिल्ली, पटना और लखनऊ समेत कई शहरों में जांच और सर्वे तेज हो सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जताई चिंता

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि भवन निर्माण और इस्तेमाल से जुड़े नियमों की अनदेखी का सीधा असर लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुई आग की घटनाओं का भी जिक्र किया. अदालत ने कहा कि भवनों की सुरक्षा और नियमों का पालन कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है.

दिल्ली में सर्वे की धीमी रफ्तार पर नाराजगी

दिल्ली के लाजपत नगर और सरोजनी नगर जैसे इलाकों में नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा खामियों का पता लगाने के लिए सर्वे कराया जाना था. अदालत ने देरी पर नाराजगी जताई. पहले आईआईटी दिल्ली के दो प्रोफेसरों और अन्य विशेषज्ञों की समिति बनाकर संरचनाओं की जांच कराने के निर्देश दिए गए थे.

पटना में 26,746 मामले सामने आए

पटना में स्थिति गंभीर नजर आई. पटना नगर निगम के हलफनामे के मुताबिक सर्वे में 26,746 ऐसी संपत्तियां मिलीं, जहां रिहायशी जगहों का इस्तेमाल व्यावसायिक काम के लिए हो रहा था. इतनी बड़ी संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए. अदालत ने पटना के पूर्व नगर आयुक्त पराशर को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई.


ये भी पढ़ें: सोनिया गांधी वोटर लिस्ट केस: 29 अगस्त को आएगा फैसला, जानें क्या है पूरा मामला


लखनऊ में 51 संपत्तियों की पहचान

लखनऊ में कार्रवाई शुरू हो चुकी है. लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि जांच में 51 संपत्तियों की पहचान हुई है और उनके खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं.

सिर्फ बुलडोजर नहीं, जिम्मेदारी भी तय होगी

अदालत का रुख सिर्फ अवैध निर्माण तोड़ने या संपत्तियां सील करने तक सीमित नहीं है. सवाल यह भी है कि नियमों का उल्लंघन वर्षों तक अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा. जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है. रिहायशी इमारतों में कारोबार बढ़ने से भीड़, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और निकासी पर असर पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है कि कारोबार के नाम पर लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest