सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना में बीआरएस विधायकों को अयोग्य करार देने के मामले में तेलंगाना सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 25 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर बार ऐसा नहीं हो सकता कि ऑपरेशन सफल हो और मरीज मर जाए. जस्टिस बीआर गवई ने अयोग्यता याचिकाओं पर लंबित निर्णयों पर सवाल उठाया है.
कोर्ट ने पूछा कि इन याचिकाओं को निपटने के लिए एक उचित समय सीमा क्या होनी चाहिए और क्या यह विधानसभा के कार्यकाल के अंत तक होना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि तब लोकतांत्रिक सिद्धांतों का क्या होगा? और कहा कि हर मामले में परिणाम यह नही हो सकता कि ऑपरेशन सफल हो और मरीज मर जाए. कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी कर रहे हैं. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पीकर से समयसीमा तय करने के लिए कहा था, लेकिन 20 फरवरी को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि स्पीकर के लिए कोई ऐसी समयसीमा तय करना संभव नहीं है.
कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा स्पीकर द्वारा सात विधायकों के अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय में देरी को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. बीआरएस ने याचिका में अयोग्यता याचिकाओं पर तेलंगाना स्पीकर को जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई है.
जिन 7 विधायकों पर दलबदल का आरोप लगा है उनमें श्रीनिवास रेड्डी परिगी, बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी, काले यादैया, टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, गुडेम महिपाल रेड्डी और एम. संजय कुमार शामिल है. बीआरएस द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि विधायकों के खिलाफ शिकायत के 9 महीने बाद भी स्पीकर ने अभी तक कोई फैसला नही लिया है.
सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि स्पीकर को चार सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश दिया जाए. हाई कोर्ट ने स्पीकर को दलबदल निरोधक अधिनियम की 10वीं अनुसूची के तहत फैसला लेने का आदेश दिया था.
-भारत एक्सप्रेस
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