वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सहित अन्य प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीआरपीसी के तहत आरोपी व्यक्तियों को दी गई कुछ सुरक्षाएं जीएसटी अधिनियम और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होगी. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सीमा शुल्क कार्यालय पुलिस अधिकारी नही है. यदि किसी व्यक्ति को इन कानूनों के तहत गिरफ्तारी की आशंका है, तो वह एफआईआर दर्ज किए बिना अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है.
कोर्ट 17 मार्च को करेगा अगली सुनवाई
जीएसटी अधिनियम के तहत जारी परिपत्रों का अधिकारियों द्वारा पालन किया जाएगा. कोर्ट 17 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने जीएसटी अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम और पीएमएलए के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली 279 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा था कि जीएसटी कानून में नियंत्रण एवं संतुलन का प्रावधान है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा उपाय किए गए है.
कोर्ट ने कही ये बात
धारा 69 (गिरफ्तार करने की शक्ति) और धारा 70 (समन करने की शक्ति) का कड़ाई से अनुपालन होना चाहिए. जब विधायिका ने सुरक्षा उपाय किए हैं, तो उन्हें कड़ाई से लागू करने की जरूरत है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि सभी मामलों में लोगों को जेल नही भेजा जा सकता है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को बीते तीन वर्षों में एक करोड़ से पांच करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के लिए जीएसटी अधिनियम में जारी किए गए नोटिस व गिरफ्तारियों से जुड़ा आंकड़ा पेश करने के निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था नोटिस और गिरफ्तारियों से लोगों का उत्पीड़न हो सकता है.
कोर्ट ने कहा था, पीएमएलए केस में कोर्ट ने लिखित रूप में गिरफ्तारी का आधार देना अनिवार्य कर दिया है. ऐसा जीएसटी के तहत भी किया जा सकता है. एएसजी ने कहा था कि कई याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों पर तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान धमकी और जबर्दस्ती करने का आरोप लगाए है. कोर्ट ने कहा था कि हम जानते हैं और किसी व्यक्ति की तलाशी और जब्ती के दौरान क्या होता है. यदि कर भुगतान से इनकार किया जाता है, तो आप संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर सकते हैं, लेकिन आपको परामर्श करने, सोचने और विचार करने के लिए कुछ समय देना होगा. आप उसे धमकी और गिरफ्तारी के दबाव में नहीं रख सकते हैं.
वही याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने जीएसटी व्यवस्था के तहत अधिकारियों की शक्तियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे व्यक्तियों की स्वतंत्रता हम हो रही है. एएसजी ने कोर्ट से कहा था कि ज्यादातर गिरफ्तारियां जांच के दौरान की जाती हैं, क्योंकि किसी मामले में जांच पूरी होने के बाद कोई गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर नहीं जाती है, बल्कि तब की जाती है जब विश्वास करने के कारण किसी गंभीर अपराध के होने का संकेत देते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




