Who is Teejan Bai
Teejan Bai Profile: भारतीय लोक संस्कृति की सबसे सशक्त आवाजों में शुमार पंडवानी गायिका तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं. लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में शनिवार देर रात अंतिम सांस ली. वह 70 वर्ष की थीं. उनके निधन की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ से लेकर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय लोककला के लिए उनकी सेवाओं को याद किया.
लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई
तीजन बाई सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे मजबूत चेहरा थीं. उन्होंने महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली पंडवानी को अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया. उनकी दमदार आवाज, भावपूर्ण अभिनय और मंच पर जीवंत प्रस्तुति ने इस लोककला को देश की सीमाओं से बाहर भी पहचान दिलाई.
करीब पांच दशक लंबे अपने करियर में उन्होंने एशिया, यूरोप और दुनिया के कई देशों में भारत की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया. जहां भी उन्होंने प्रस्तुति दी, वहां दर्शक उनकी कला के मुरीद हो गए.
बचपन में सुनी महाभारत की कहानियां
तीजन बाई का जन्म वर्ष 1956 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था (Who is Teejan Bai). उनके पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था. बचपन में वह अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कहानियां सुना करती थीं. यही कहानियां आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बन गईं.
उनकी प्रतिभा को सबसे पहले उमेद सिंह देशमुख ने पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी की प्रस्तुति दी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
समाज ने किया विरोध
जब तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली में प्रस्तुति देना शुरू किया, तब इस शैली पर मुख्य रूप से पुरुष कलाकारों का वर्चस्व था. ऐसे समय में एक महिला का इस क्षेत्र में उतरना आसान नहीं था. उन्हें सामाजिक विरोध, आलोचनाओं और कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. हाथ में तंबूरा और चेहरे पर आत्मविश्वास के साथ जब वह मंच पर उतरती थीं, तो अपनी आवाज़ और अभिनय से दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देती थीं. उनकी प्रस्तुति में सिर्फ गायन नहीं होता था, बल्कि ऐसा लगता था मानो महाभारत के पात्र आंखों के सामने जीवंत हो उठे हों.
हबीब तनवीर से मिली नई उड़ान
तीजन बाई के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रस्तुति देखी. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने तीजन बाई को बड़े मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
इसके बाद उन्हें देश और विदेश के प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने का अवसर मिला. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया और हर मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई.
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देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा. उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया गया. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान, देवी अहिल्या सम्मान, एम.एस. सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार और डी.लिट जैसी कई उपलब्धियां उनके नाम रहीं.
तीजन बाई का जाना केवल एक महान कलाकार का निधन नहीं है, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत भी है. उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची प्रतिभा किसी भी सामाजिक बंधन से बड़ी होती है. आज भले ही उनकी आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई हो, लेकिन पंडवानी की हर प्रस्तुति में उनका योगदान और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी. आने वाली पीढ़ियां उन्हें उस कलाकार के रूप में याद रखेंगी, जिसने छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्व मंच तक पहुंचाकर उसे अमर बना दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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