Student Protest against UGC: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लाए गए नए नियमों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़कों तक छात्र अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. UGC ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 के प्रावधान लागू किए थे, जिसके बाद से इस पर बवाल मचा हुआ है.
लखनऊ में छात्रों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित विश्वविद्यालय में यूजीसी के नए रेगुलेशन के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. विश्वविद्यालय के गेट पर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र होकर यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं.
हालात को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारी छात्रों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने और उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं. फिलहाल परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और हालात पर नजर रखी जा रही है.
गोरखपुर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय गेट पर भी भारी संख्या में छात्र-छात्राएं हुए इकट्ठा. यूजीसी नए कानून को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. मौके पर पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए हैं और छात्रों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं.
‘ये हिंदू समाज को बांटने वाला कानून’- छात्र
यूजीसी एक्ट के खिलाफ देशभर में जारी विरोध के बीच अलीगढ़ में भी छात्र राष्ट्रवादी संगठन सड़कों पर उतरा. सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला अधिकारी कार्यालय गेट पर प्रदर्शन किया. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्कर शर्मा ने यूजीसी एक्ट को हिंदू समाज को बांटने वाला कानून बताते हुए इसे जल्द वापस लेने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कानून वापस नहीं हुआ, तो 2027 में इसके राजनीतिक नतीजे देखने को मिलेंगे.
ढाई घंटे के प्रदर्शन के बाद UGC के चेयरमैन विनीत जोशी ने सवर्ण सेना के साथ बातचीत के बाद प्रदर्शन को खत्म कर दिया. सवर्ण सेना के सहसंस्थापक शिवम् सिंह ने कहा कि UGC को 15 दिन का वक्त दिया गया है, अगर ये वापस नहीं होगा तो प्रदर्शन को दोबारा किया जाएगा.
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कानून
यूजीसी के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. याचिका में दावा किया गया है कि यह प्रावधान यूजीसी अधिनियम 1956 के खिलाफ है और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना को समाप्त करता है. इसी के साथ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इन प्रावधानों को निरस्त करने की मांग की है.
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