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70 फीट गहरे गड्ढे में 2 साल का मासूम, चट्टानों ने मुश्किल किया रेस्क्यू; कलेक्टर और एसपी मौके पर तैनात

उज्जैन के बड़नगर में 70 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 2 साल के भागीरथ को बचाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं. कलेक्टर और एसपी खुद मौके पर मोर्चा संभाले हुए हैं. कठोर चट्टानों के कारण रेस्क्यू में देरी हो रही है.

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Ujjain Borwell Rescue: मनोज/उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां बड़नगर तहसील के झालरिया गांव में 2 साल का मासूम भागीरथ पिछले कई घंटों से 70 फीट गहरे बोरवेल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. कल रात से शुरू हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है. मौके पर उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा कल रात से ही डटे हुए हैं. मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन जमीन के नीचे मौजूद चट्टानें इस मिशन में सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं.

क्या है पूरा मामला?

ये दुखद घटना झालरिया गांव की है, जहां राजस्थान के पाली जिले से भेड़ चराने आया एक परिवार डेरा डाले हुए था. मासूम भागीरथ के पिता प्रवीण देवासी ने आंखों में आंसू लिए बताया कि उनका बेटा दीवार के पास खेल रहा था. वहां एक बोरवेल पत्थर से ढका हुआ था. खेलते-खेलते भागीरथ ने उस पत्थर को हटा दिया और शायद उसे पानी की बाल्टी समझकर उसमें पैर डाल दिया. देखते ही देखते वो अंधेरे गड्ढे में समा गया. पास ही खड़ी मां ने उसे बचाने के लिए दौड़ लगाई, लेकिन उसे
पकड़ नहीं पाई.

NDRF और SDRF का मिशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत भोपाल से एनडीआरएफ (NDRF) की टीम बुलाई. फिलहाल तीन जिलों की एसडीआरएफ (SDRF) टीमें और एनडीआरएफ मिलकर इस रेस्क्यू को अंजाम दे रही हैं. एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बच्चे को बचाने के लिए 5 पोकलेन मशीनों की मदद से बोरवेल के समानांतर एक बड़ा गड्ढा खोदा जा रहा है.
रेस्क्यू टीम करीब 40 फीट तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बाद आई बेहद कठोर चट्टानों ने काम की गति को धीमा कर दिया है. ड्रिलिंग मशीनें इन चट्टानों को काटने की कोशिश कर रही हैं, ताकि सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचा जा सके.

कैमरे से निगरानी

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि बोरवेल के भीतर डाले गए कैमरे में बच्चे की हलचल नजर आ रही है. भागीरथ को लगातार पाइप के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है ताकि उसे सांस लेने में कोई दिक्कत न हो. डॉक्टर और मेडिकल टीमें भी मौके पर एंबुलेंस के साथ तैनात हैं. कलेक्टर रौशन सिंह खुद रेस्क्यू साइट पर मौजूद रहकर एक-एक मिनट की अपडेट ले रहे हैं और मशीनों के संचालन को निर्देशित कर रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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