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काशी में लगी ‘महाकाल’ की वैदिक घड़ी, पीएम मोदी ने किया अवलोकन; क्या है खासियत?

PM मोदी ने गुरूवार को वैदिक घड़ी का लोकार्पण (inauguration) किया. इस घड़ी के निर्माण का काम पहले मोहन यादव ने शुरू की थी और विधायक निधि से पैसे भी जारी किए थे. भारत में पहले समय की गणना वैदिक घड़ी से होती थी.

Vedic Clock

Indian Time Calculation Vedic Panchang : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश को 17,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उपहार दिया. इस सौगात में सबसे खास रहा उज्जैन में स्थापित विक्रमादित्य ‘वैदिक घड़ी’ (Vedic clock) का लोकार्पण.

महाकाल की नगरी उज्जैन, जो सदियों से समय गणना का केंद्र रही है, अब अपनी उस प्राचीन विरासत को डिजिटल अवतार में दुनिया के सामने पेश कर रही है.

वैदिक घड़ी की मुख्य विशेषताएं

यह केवल समय बताने वाली घड़ी नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और विज्ञान का एक अनूठा संगम है:

– ऊंचाई: यह घड़ी उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के पास 85 फीट ऊंचे टावर पर स्थापित की गई है.
– समय की गणना:  यह 24 घंटे के ग्रीनविच समय को 30 ‘मुहूर्त’ में विभाजित करती है. इसकी गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलती है.
– डिजिटल फीचर्स:  इंटरनेट से जुड़ी यह स्मार्ट घड़ी वैदिक पंचांग, तिथि, ग्रहों की स्थिति, ज्योतिषीय गणना और भविष्यवाणियों की जानकारी भी देगी.
– निर्माण:  सइसे लखनऊ की ‘आरोहण संस्था’ द्वारा तैयार किया गया है.

मोहन यादव की पहल और विजन

इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) को जाता है. उन्होंने विधायक रहते हुए 2022 में इस टावर के निर्माण की घोषणा की थी. उन्होंने इसके लिए अपनी विधायक निधि से 1.68 करोड़ रुपये भी आवंटित किए थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही इस परियोजना को उनकी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.

उज्जैन से ही क्यों है इसका गहरा संबंध?

उज्जैन (Ujjain) को प्राचीन काल से ही भारत का समय निर्धारक शहर माना जाता रहा है:
1. कर्क रेखा: उज्जैन भौगोलिक रूप से कर्क रेखा पर स्थित है.
2. प्राचीन मध्याह्न रेखा: वर्तमान की 82.5°E मानक समय रेखा से पहले, उज्जैन (75.78°E) को ही भारत की समय मध्याह्न रेखा माना जाता था.
3. विक्रम संवत: सम्राट विक्रमादित्य की इस नगरी से ही हिंदू कैलेंडर ‘विक्रम संवत’ की शुरुआत हुई थी. माना जाता है कि 1906 से पहले भारत में समय की गणना इसी वैदिक पद्धति से होती थी.

उज्जैन में वैदिक घड़ी की स्थापना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत के समृद्ध खगोलीय ज्ञान और विरासत से भी परिचित कराएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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