यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने भारत दौरे के दौरान भारतीय नेतृत्व और ‘विकसित भारत’ के विजन की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और 2047 तक पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है.
स्टार्मर ने कहा, “मैंने यहां जो देखा, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत अपने लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है. हम इस यात्रा में भारत के साझेदार बनना चाहते हैं.” मुंबई में आयोजित इस मुलाकात को उन्होंने भारत की आर्थिक और वित्तीय प्रगति का प्रतीक बताया.
ऐतिहासिक व्यापार समझौता
कीर स्टार्मर ने भारत और यूके के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को “ऐतिहासिक क्षण” करार दिया. उन्होंने इसे भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस साझेदारी के लिए धन्यवाद दिया. स्टार्मर ने कहा, “यह समझौता दोनों देशों के लिए बड़ी जीत है. हम एक आधुनिक साझेदारी बना रहे हैं, जो भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित है.” पिछले दो दिनों में भारतीय और ब्रिटिश व्यापारिक नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को उन्होंने “अत्यंत उत्पादक” बताया, जिसमें सहयोग और नवाचार का उत्साह दिखा.
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
यूके पीएम ने भारत की वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि भारत और यूके कॉमनवेल्थ और जी20 जैसे मंचों पर एक साथ काम करते हैं और यूके भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान लेते देखना चाहता है. स्टार्मर ने भारत की प्रगति को “उल्लेखनीय” बताया और मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में इस मुलाकात का विशेष महत्व बताया.
वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में स्टार्मर ने भारत-यूके साझेदारी को स्थिरता और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट जैसे मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. भारत ने शांति और कूटनीति के जरिए इन क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया.
भारत-यूके साझेदारी का भविष्य
स्टार्मर ने जुलाई में यूके में पीएम मोदी की मेजबानी को याद करते हुए कहा कि कुछ ही महीनों बाद भारत का दौरा करना उनके लिए सम्मान की बात है. उन्होंने इस साझेदारी को “आत्मविश्वास और साझा उत्साह” से परिभाषित किया, जो दोनों देशों के बीच नए अवसरों को जन्म देगा. यह दौरा और व्यापार समझौता भारत-यूके संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने का प्रतीक है.
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