यूक्रेनी दूत ओलेना इल्चुक ने गुरुवार (21 अगस्त) को रूस के साथ युद्ध के दौरान उनके देश को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया.
ओलेना इल्चुक यूक्रेनी दूतावास में वाणिज्य दूतावास विभाग में तृतीय सचिव हैं. उन्होंने एक मीडिया कार्यक्रम में भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविसिएने के साथ ‘कूटनीति उनके नज़रिए से’ विषय पर एक सत्र में भाग लिया.
ओलेना इल्चुक ने कहा, “सबसे पहले, मैं यूक्रेन की ओर से मानवीय सहायता के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कहना चाहती हूं. भारत निश्चित रूप से वैश्विक दक्षिण का एक अग्रणी देश है और हमें इतिहास के सही पक्ष वाले और भी देशों की ज़रूरत है.”
उन्होंने आगे कहा, “कई महिलाएं अपने बच्चों की रक्षा और उन्हें लगातार गोलाबारी से बचाने के लिए दूसरे देशों में भाग गई हैं. बिना योजना के अप्रवासी बनना मुश्किल है क्योंकि ज़्यादातर महिलाएं युद्ध के बिना देश नहीं छोड़तीं. आजकल यह बेहद मुश्किल है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो अपनी सामान्य ज़िंदगी, काम, पढ़ाई, परिवार, बच्चों और माता-पिता को संभालने के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं, यह बेहद चुनौतीपूर्ण है.”
पुतिन को यूक्रेन देश का विचार बर्दाश्त नहीं
युद्ध समाप्त करने के लिए शांति समझौते पर चल रही बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन को बढ़त दिए जाने के जवाब में ओलेना ने आगे कहा कि अलास्का में उनकी ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान यूक्रेन पर बमबारी हुई थी. उन्होंने कहा कि जब पुतिन अलास्का में थे, तब भी यूक्रेन पर बमबारी हो रही थी, इसलिए रूसियों के तथाकथित कूटनीतिक प्रयासों के बारे में आपको बस इतना ही जानना है.
उन्होंने कहा. “पिछले लगभग 400 सालों में रूसियों के साथ हमारे कई समझौते विफल रहे हैं क्योंकि रूसी अपने वादों पर खरे नहीं उतरते; और अब आप परिणाम देख रहे हैं… ऐसा लग सकता है कि यह ज़मीनों के लिए युद्ध है, जो सच भी है, लेकिन अगर आप गहराई से सोचें और इतिहास पर शोध करें, तो यह वास्तव में एक अस्तित्वगत युद्ध है. रूसियों को यूक्रेनी पहचान, भाषा, मानसिकता, या यूक्रेनियों के एक अलग राष्ट्र होने और अपना अलग क्षेत्र होने का विचार बर्दाश्त नहीं है.”
रूस ने पुतिन और राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच द्विपक्षीय वार्ता को यह कहकर कम करके आँका है कि यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर किसी भी चर्चा में यह शामिल होना ज़रूरी है, जिससे शीघ्र शांति समझौते की उम्मीदें कम हो गई हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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