संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर बिना नाम लिए पाकिस्तान की दोहरी नीति और आतंकवाद पर उसकी भूमिका को बेनकाब कर दिया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने तीखे लेकिन संतुलित भाषण में साफ कर दिया कि जो देश आतंकवाद को “राजनीति का औजार” बनाते हैं, उन्हें इसका अंजाम भुगतना ही होगा.
“जो देश आतंक को पनाह देते हैं या उसका समर्थन करते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि यह ज़हर एक दिन उन्हीं को डसेगा,” जयशंकर ने कहा.
पाकिस्तान पर परोक्ष हमला
हालांकि जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था. उन्होंने उस देश को “आतंक का केंद्र” बताया, जहां से दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों की जड़ें जुड़ी हुई हैं. उन्होंने कहा कि UN की आतंकवादी सूची ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जो उसी एक देश के नागरिक हैं.
जयशंकर ने इस साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि जब निर्दोष पर्यटकों की हत्या की गई, तो भारत ने न सिर्फ अपने लोगों की रक्षा की बल्कि इस हमले के आयोजकों को भी न्याय के कटघरे में लाया.
“भारत आतंक के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा. आतंकवाद एक साझा खतरा है, और दुनिया को मिलकर इससे निपटना होगा,” उन्होंने जोर देकर कहा.
जयशंकर ने UN मंच से सीधा सवाल उठायाजब कोई देश आतंकियों को खुलेआम हीरो बनाता है, जब आतंकी अड्डे औद्योगिक स्तर पर चलाए जाते हैं, तब क्या दुनिया आंखें मूंदे बैठी रहे? उन्होंने कहा कि ऐसे रवैये की स्पष्ट और कठोर निंदा होनी चाहिए.
भारत ने किया पाकिस्तान के दावों का करारा जवाब
UNGA में भारत की प्रतिनिधि और प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण को “बेहूदा नाटक” करार दिया. गहलोत ने कहा कि यह वही पाकिस्तान है जिसने सालों तक ओसामा बिन लादेन को पनाह दी, और अब The Resistance Front जैसे आतंकी संगठनों को UNSC में ढाल बनकर बचाता है.
उन्होंने पाकिस्तान की उन बातों को भी खारिज किया जिसमें उसने खुद को आतंक से लड़ने वाला देश बताया था. गहलोत ने तंज कसते हुए कहा“अगर जले हुए एयरबेस और टूटी-फूटी इमारतें जीत कहलाती हैं, तो पाकिस्तान को मुबारक हो.”
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“कोई तीसरा पक्ष नहीं, भारत-पाक विवाद द्विपक्षीय ही रहेगा”
भारत ने दो टूक कहा कि भारत-पाक विवादों में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं हो सकती. ये भारत की स्पष्ट और पुरानी नीति है. अमेरिका द्वारा मध्यस्थता की कोशिशों के बाद अब खुद वॉशिंगटन भी मान चुका है कि ये मामले द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझने चाहिए.
“परमाणु हथियारों की आड़ में आतंक नहीं चलेगा”
गहलोत ने पाकिस्तान की रणनीति को लेकर कहा कि आतंकवाद को परमाणु हथियारों के डर की आड़ में छुपाने की कोशिश अब नहीं चलेगी. भारत ने साफ कर दिया कि आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों में कोई फर्क नहीं किया जाएगादोनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा.
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में “हिंदुत्वा आधारित चरमपंथ” की बात की थी, जिस पर गहलोत ने पलटते हुए कहा, “जो देश खुद नफरत, असहिष्णुता और सांप्रदायिकता में डूबा हो, वो दूसरों को धर्म की सीख देने की कोशिश न करे.”
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-भारत एक्सप्रेस
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