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मनरेगा की जगह नया ‘विकसित भारत- G RAM G’ बिल, विपक्ष-सरकार आमने-सामने

Vikasit Bharat Bill: केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून की जगह नया ‘विकसित भारत- G RAM G’ बिल पेश किया है. विपक्ष ने इसे गरीबों के रोजगार अधिकार पर हमला बताया, जबकि सरकार का कहना है कि यह बदलाव भविष्य की जरूरतों के अनुरूप है.

Vikasit Bharat Bill: सरकार ने मनरेगा कानून की जगह नया ‘विकसित भारत- G RAM G’ बिल लाने का फैसला किया है. इस पर सियासत तेज हो गई है. विपक्ष का कहना है कि यह गरीबों के रोजगार के अधिकार पर सीधा हमला है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि गरीब जनता के रोजगार का अधिकार खत्म किया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि काम के दिन तो बढ़ा दिए गए हैं लेकिन मजदूरी क्यों नहीं बढ़ाई गई?

प्रियंका गांधी का सवाल

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि कहां और कौन सा काम होगा लेकिन अब केंद्र सरकार यह फैसला करेगी. ऐसे में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कैसे की जा सकती है? उन्होंने नाम बदलने की राजनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि नया बिल 100 दिनों की आय के अधिकार को कमजोर करेगा. उन्होंने दावा किया कि कई जगह मनरेगा कर्मचारियों को अभी तक मजदूरी नहीं मिली है.

सरकार का क्या कहना है?

वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया है. केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि मौजूदा मनरेगा कानून में बदलाव बेहद जरूरी था. समय-समय पर संविधान में भी संशोधन होते हैं और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. सरकार का दावा है कि नया बिल रोजगार व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा.

नाम बदलने पर भी राजनीति

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अब वे नोटों से भी गांधी की तस्वीर हटा देंगे. ‘जी राम जी’ नाम को लेकर भी सियासी संग्राम शुरू हो गया है.

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विवाद की जड़ क्या है?

दरअसल, मनरेगा की जगह लाए जा रहे नए बिल पर संसद से सड़क तक बहस छिड़ गई है. विपक्ष का कहना है कि गरीबों के 100 दिन के रोजगार के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है और ग्राम पंचायतों की भूमिका घटाई जा रही है. जबकि सरकार का दावा है कि मनरेगा में सुधार समय की मांग है और नया कानून विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप है.

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-भारत एक्सप्रेस



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