West Bengal Assembly Election: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (23 और 29 अप्रैल) से ठीक पहले राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर भारी तनाव पैदा हो गया है. एक तरफ मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी जुलूस के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ा दी है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग (ECI) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कथित भड़काऊ भाषण को लेकर सख्त रवैया अपनाते हुए रिपोर्ट तलब की है. इसके अलावा चुनावी हिंसा में लापरवाही बरतने पर एक पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड भी किया गया है.
मुर्शिदाबाद में रामनवमी पर पथराव
मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में शुक्रवार को रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई. पुलिस के मुताबिक, मैकेंजी पार्क की ओर जा रहे जुलूस के दौरान सिसातला इलाके में तेज संगीत बजाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था. देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि फूलतला क्रॉसिंग समेत तीन अलग-अलग जगहों पर भारी पथराव, लूटपाट और दुकानों में आगजनी की घटनाएं हुईं. इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए हैं.
इलाके में धारा 144 लागू, केंद्रीय बल तैनात
हालात को बेकाबू होता देख स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ (CRPF) और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों को तुरंत इलाके में तैनात किया गया. प्रशासन ने रघुनाथगंज में धारा 144 लागू कर दी है, जिसके तहत चार या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अजित सिंह यादव ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. वहीं, बीजेपी नेता धनंजय घोष ने इस हिंसा को ‘पूर्व नियोजित’ बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि टीएमसी नेता मोफिजुल इस्लाम ने स्थानीय लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.
ममता बनर्जी के भड़काऊ भाषण पर एक्शन
हिंसा के अलावा, राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से ममता बनर्जी के 25 मार्च को दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी में दिए गए एक भाषण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आरोप है कि नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल के मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कथित तौर पर सीआरपीएफ (CRPF) कर्मियों को धमकी दी थी. उन्होंने महिलाओं और लड़कियों से खुलेआम अपील की थी कि वे बड़ी संख्या में पोलिंग बूथ पर मौजूद रहें और जरूरत पड़ने पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए ‘घरेलू रसोई के उपकरणों (बर्तनों)’ का इस्तेमाल करें. आयोग इस वीडियो की जांच कर रहा है.
लापरवाही पर इंस्पेक्टर सस्पेंड
चुनाव आयोग ने राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है. 26 मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती बाजार में बीजेपी उम्मीदवार विकास सरदार के चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसक झड़प मामले में बासंती पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर अविजित पॉल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. आयोग का कहना है कि पूर्व सूचना होने के बावजूद पॉल सुरक्षा व्यवस्था करने और CAPF की मदद मांगने में विफल रहे.
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इस घटना के बाद बीजेपी सांसद बिप्लब कुमार देब ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में गुंडों और ‘जिहादियों’ का साम्राज्य खड़ा किया गया है, जो बीजेपी कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित हमले कर रहे हैं. आगामी 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले पश्चिम बंगाल में जिस तरह से एक के बाद एक हिंसक घटनाएं और भड़काऊ बयानों के मामले सामने आ रहे हैं, उसने चुनाव आयोग के सामने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने की एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
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